Pehowa News: पिहोवा में दिव्य गीता सत्संग की शुरुआत, स्वामी ज्ञानानंद महाराज बोले- गीता में है हर तनाव का इलाज
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद: अर्जुन ने नारायणी सेना नहीं भगवान को चुना, जानिए क्यों धर्म ही सबसे बड़ा साथी है
Pehowa News:पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा) हरियाणा की पवित्र भूमि कुरुक्षेत्र स्थित पिहोवा की अनाज मंडी में शुक्रवार को दिव्य गीता सत्संग का भव्य शुभारंभ हुआ। सत्संग के पहले ही दिन गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज के दर्शन और प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। महाराज श्री ने अपने ओजस्वी और अमृतमयी वचनों से उपस्थित जनसमूह को निहाल करते हुए कहा कि जब कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में महाबली अर्जुन मोह और विषाद से व्याकुल हो गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जो उपदेश दिया था, वही श्रीमद्भगवद्गीता है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि मानव जीवन के हर संघर्ष को पार करने की सबसे बड़ी कला है।
कुरुक्षेत्र का युद्ध बाहरी नहीं, इंसान के अपने मन के भीतर चलता है
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अर्जुन कोई सामान्य योद्धा नहीं थे, वे अद्वितीय थे और उन्होंने जीवन में कभी हार नहीं देखी थी। लेकिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में उनका असली संघर्ष अपने ही लोगों के प्रति उपजे मोह और मन की चंचलता से था। आज भी हर इंसान के भीतर एक महाभारत चल रहा है—चाहे वह परिवार हो, कार्यस्थल हो या मन के विचार। जब मनुष्य का मन भ्रमित हो जाता है, तब केवल गीता के विचार ही उसे स्थिरता और सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अर्जुन की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उन्होंने हर परिस्थिति में धर्म का साथ कभी नहीं छोड़ा।
साधनों से बड़ा साध्य है: दुर्योधन भौतिकता तो अर्जुन अध्यात्म का प्रतीक
सत्संग के दौरान महाराज श्री ने दुर्योधन और अर्जुन की तुलना करते हुए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश दिया। जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी विशाल नारायणी सेना और स्वयं के बीच चुनाव करने का अवसर दिया, तो दुर्योधन ने सेना (साधन) चुनी, जबकि अर्जुन ने बिना संशय के निहत्थे भगवान (साध्य) को चुना। दुर्योधन भौतिकवाद का प्रतीक था और अर्जुन अध्यात्म का। भौतिकवादी सोच पूछती है कि ‘परमात्मा कहां है?’, जबकि अध्यात्म कहता है कि ‘परमात्मा कहां नहीं है?’ उन्होंने कहा कि यदि जीवन-रूपी रथ की लगाम भगवान के हाथों में दे दी जाए, तो दुनिया की कोई भी ताकत इंसान को पराजित नहीं कर सकती।
युवाओं में बढ़ता तनाव चिंताजनक, घर-घर तक पहुंचे गीता का ज्ञान
वर्तमान समय की चुनौतियों पर बात करते हुए स्वामी जी ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज छोटी सी उम्र के बच्चे और युवा अवसाद, तनाव और मानसिक अशांति से जूझ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी जड़ों और जीवन-मूल्यों से दूरी है। यदि भारत का युवा विवेक और नैतिकता को नहीं अपनाएगा, तो इसके गंभीर परिणाम पूरे समाज को झेलने पड़ेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि गीता को केवल पूजास्थल पर रखकर पूजें नहीं, बल्कि इसे पढ़ें, समझें और अपने आचरण में उतारें।
कैबिनेट मंत्री राजेश नागर समेत कई प्रमुख हस्तियां रही मौजूद
सत्संग के उपरांत हरियाणा सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने महाराज जी का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें स्वामी जी का सान्निध्य मिलता है, मन को अद्भुत आत्मिक शांति मिलती है। इससे पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आशीष चक्रपाणि, समाजसेवी उमेश गोयल, इंदर सिंगला और आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान नवीन गर्ग ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया। 48 कोस परिक्रमा के अध्यक्ष रविंद्र सागवान, एडवोकेट शिव दर्शन मुरार, दर्शना ढींगरा, तरसेम गर्ग और जगदीश गौड़ ने गीता पूजन में भाग लिया। आढ़ती एसोसिएशन ने आरती उतारी और श्री अमरनाथ सेवा मंडल की ओर से श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की सेवा निभाई गई।
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