July 31, 2026

Yamunanagar News: यमुनानगर में 11 साल की दुष्कर्म पीड़िता ने दिया बच्ची को जन्म, सामान्य प्रसव के बाद दोनों स्वस्थ

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Yamunanagar News: यमुनानगर में 11 साल की दुष्कर्म पीड़िता ने दिया बच्ची को जन्म, सामान्य प्रसव के बाद दोनों स्वस्थ

11 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता बनी मां, आरोपी ड्राइवर जेल की सलाखों के पीछे

Yamunanagar News: यमुनानगर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है। छछरौली इलाके की रहने वाली महज 11 साल की एक दुष्कर्म पीड़िता स्कूली छात्रा ने यमुनानगर के सिविल अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया है। इतनी कम उम्र में इस दर्दनाक स्थिति से गुजरी मासूम की अस्पताल में सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) कराई गई।

अस्पताल प्रशासन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के अनुसार, डॉक्टरों की देखरेख में कराया गया प्रसव पूरी तरह सुरक्षित रहा। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं और स्थिति को देखते हुए उन्हें अगले दो से तीन दिनों में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

मई में सामने आया था मामला, तब 7 महीने की गर्भवती थी मासूम

इस जघन्य अपराध की दास्तान इस साल मई महीने में उस वक्त उजागर हुई थी, जब बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को उसके गर्भवती होने का पता चला। आनन-फानन में परिजन छछरौली थाने पहुंचे और मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। चिकित्सीय जांच के दौरान खुलासा हुआ कि 11 साल की मासूम उस समय करीब सात महीने की गर्भवती हो चुकी थी।

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत पॉक्सो (POCSO) एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

फार्मेसी कंपनी के मालिक का ड्राइवर निकला दरिंदा

पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाने वाला दरिंदा छछरौली क्षेत्र की एक नामी फार्मेसी कंपनी के मालिक का ड्राइवर है। उसने बच्ची को डरा-धमकाकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद है।

इस पूरे मुश्किल दौर में छछरौली थाने में तैनात महिला पुलिसकर्मी मंजीत कौर ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। उन्होंने न केवल जांच के दौरान बच्ची को मानसिक संबल दिया, बल्कि अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर डिलीवरी की प्रक्रिया तक एक ढाल की तरह उसके साथ खड़ी रहीं।

न्याय की आस में बिलखता परिवार

एक 11 साल की मासूम, जिसकी उम्र खेलने-पढ़ने की थी, आज इस मोड़ पर खड़ी है जहां उसके सामने जिंदगी के कई अनसुलझे सवाल हैं। इस घिनौने अपराध से बच्ची को जो मानसिक और शारीरिक आघात पहुंचा है, उसकी भरपाई कर पाना नामुमकिन है। फिलहाल पीड़ित परिवार की नजरें अदालत की त्वरित सुनवाई पर टिकी हैं, ताकि दरिंदे को सख्त से सख्त सजा मिल सके।

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