Punjab DA Dispute : देश में सबसे ज्यादा सैलरी दे रहे हम : हरपाल चीमा

देश में सबसे ज्यादा सैलरी दे रहे हम : हरपाल चीमा
Punjab DA Dispute : पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और बकाए एरियर को लेकर छिड़े सियासी और कानूनी संग्राम के बीच मान सरकार के तीन प्रमुख मंत्रियों ने मोर्चा संभाला है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के दावों को सिरे से खारिज किया। वित्त मंत्री चीमा ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पंजाब के सरकारी कर्मचारी पूरे देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं।
वित्त मंत्री ने तुलनात्मक आंकड़े रखते हुए बताया कि बेसिक पे और डीए को मिलाकर देखें तो पंजाब के क्लर्क, ड्राइवर, स्टेनोग्राफर, शिक्षक और पुलिसकर्मियों का वेतन हरियाणा, राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश और यहां तक कि गुजरात से लगभग 28 प्रतिशत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि पंजाब अपने कुल राजस्व का 51 फीसदी हिस्सा सिर्फ सैलरी और पेंशन पर खर्च कर रहा है, जबकि अन्य राज्यों में यह औसत 38 प्रतिशत के आसपास है।
14,191 करोड़ रुपए का एरियर पुरानी सरकारों की देन, विपक्ष कर रहा गुमराह
कर्मचारियों के बकाए पर बोलते हुए हरपाल चीमा ने स्पष्ट किया कि 2016 से 2021 के बीच का करीब ₹14,191 करोड़ का डीए एरियर पिछली कांग्रेस और अकाली-भाजपा सरकारों के कार्यकाल का है। उन्होंने कहा कि 2021 में चुनावी फायदे के लिए डीए लागू करने की घोषणा तो की गई, लेकिन जाते-जाते भी कांग्रेस सरकार इसका भुगतान नहीं कर पाई। हमारी सरकार ने लिक्विडेशन प्लान बनाकर अब तक ₹4,500 करोड़ का भुगतान कर्मचारियों और पेंशनरों को कर दिया है।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि पंजाब सिविल सर्विस रिवाइज्ड-पे रूल्स, 2021 के तहत राज्य सरकार को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि कब और कितना डीए देना है। इसमें केंद्रीय इंडेक्स या केंद्र के नियमों को स्वचालित रूप से लागू करने की कोई अनिवार्यता नहीं है। वहीं बीजेपी पर निशाना साधते हुए चीमा ने सवाल उठाया कि आर्टिकल 14 का पाठ पढ़ाने वाले बीजेपी नेता अपने शासित राज्यों में यह नियम क्यों लागू नहीं करते।
कर्मचारी हमारी रीढ़, बातचीत से निकलेगा हल : अमन अरोड़ा
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारी किसी भी शासन तंत्र की रीढ़ की हड्डी होते हैं और सरकार उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानती है। उन्होंने अपील की कि विपक्षी दलों के बहकावे में आने के बजाय कर्मचारी टेबल पर बैठकर बातचीत से रास्ता निकालें।
उन्होंने कहा कि सरकार को राज्य के उन 3 करोड़ आम लोगों के हितों का भी ध्यान रखना है जो सरकारी तंत्र का हिस्सा नहीं हैं। फिलहाल सरकार 42% डीए दे रही है और संवाद के जरिए हर समस्या का हल खोजने के लिए तत्पर है।
