August 13, 2026

Raksha Bandhan Shubh Muhurat: 28 अगस्त को रक्षाबंधन, चंद्र ग्रहण के बावजूद क्यों बेफिक्र होकर बांध सकती हैं राखी? पंचांग ने दूर किया भ्रम

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Raksha Bandhan Shubh Muhurat: 28 अगस्त को रक्षाबंधन, चंद्र ग्रहण के बावजूद क्यों बेफिक्र होकर बांध सकती हैं राखी? पंचांग ने दूर किया भ्रम

28 अगस्त को रक्षाबंधन, चंद्र ग्रहण के बावजूद क्यों बेफिक्र होकर बांध सकती हैं राखी?

Raksha Bandhan Shubh Muhurat: इस बार रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर श्रद्धालुओं और आम लोगों के मन में बड़ा भ्रम बना हुआ है। चर्चा है कि रक्षाबंधन के दिन ही चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और ग्रहण समाप्त होने तक श्रावण पूर्णिमा की तिथि भी निकल जाएगी। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि भद्रा और ग्रहण के फेर में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र कब बांधें? हालांकि, पंचांग और ज्योतिषाचार्यों की मानें तो डरने या असमंजस में पड़ने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त, गुरुवार की सुबह 9:08 बजे शुरू हो रही है, जो अगले दिन 28 अगस्त, शुक्रवार की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। शास्त्रों में उदयातिथि यानी सूर्योदय के समय मौजूद तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

भारत में अदृश्य रहेगा ग्रहण, सूतक काल का नियम नहीं होगा लागू

चंद्र ग्रहण की बात करें तो 28 अगस्त की सुबह 6:55 बजे ग्रहण शुरू होगा और दोपहर 12:30 बजे इसका समापन होगा। सामान्य तौर पर चंद्र ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही सूतक काल लागू हो जाता है, जिसमें धार्मिक व मांगलिक कार्यों की सख्त मनाही होती है। लेकिन राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

शास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि जो ग्रहण जहां दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल या धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होता। यह चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के देशों में दिखाई देगा। चूंकि उस समय भारत में दिन का समय होगा, इसलिए यहां ग्रहण अदृश्य रहेगा। सूतक काल न लगने की वजह से मांगलिक कार्यों पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी और लोग बेझिझक त्योहार मना सकेंगे।

सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक रहेगा सबसे शुभ मुहूर्त

28 अगस्त को भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनों को सुबह का समय सबसे उत्तम मिलेगा। पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक विद्यमान है, इसलिए रक्षाबंधन का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक रहेगा। बहनों को पूजा-अर्चना और राखी बांधने के लिए लगभग पौने चार घंटे का बेहद शुभ समय प्राप्त होगा।

अगर किसी कारणवश बहनें इस समय सीमा में राखी न बांध पाएं, तो भी घबराने की जरूरत नहीं है। चूंकि ग्रहण का कोई दोष नहीं है, इसलिए दोपहर के राहुकाल के समय को छोड़कर पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा सकता है।

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