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Rewari : कैटल फ्री रेवाड़ी की खुली पोल, अवारा पशुओं का शहर में कहर, विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी रोष आज करेंगें प्रदर्शन

Rewari : कैटल फ्री रेवाड़ी की खुली पोल, अवारा पशुओं का शहर में कहर, विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी रोष आज करेंगें प्रदर्शन

प्रतीकात्मक फोटो

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Rewari : शहर में आवारा और पालतू मवेशियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब यह नागरिकों की जान पर भारी पड़ने लगा है। अगस्त माह के दौरान शहर में अलग-अलग स्थानों पर हुए पशुओं के हमलों में एक सेवानिवृत्त कैप्टन सहित दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।

लगातार हो रही इन मौतों के बाद जिला प्रशासन और नगर परिषद के ‘कैटल फ्री सिटी’ के दावे कागजी साबित होते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पशुपालकों की दबंगई और प्रशासनिक खामोशी के खिलाफ आज विभिन्न सामाजिक संगठन नेहरू पार्क में एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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महज कुछ दिनों में दो जिंदगी लील गए हादसे

सिलसिलेवार मामलों की शुरुआत 5 अगस्त की शाम को हुई, जब सेक्टर-4 निवासी 71 वर्षीय सेवानिवृत्त कैप्टन जगराम यादव स्कूटी पर सवार होकर सब्जी लेकर अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में एक तेज रफ्तार गाय और सांड ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल कैप्टन ने निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

इसके ठीक छह दिन बाद, 11 अगस्त की सुबह माता चौक निवासी प्रताप सिंह यादव (68) अपनी दैनिक सैर पर निकले थे, तभी मवेशियों के एक हिंसक झुंड ने उन पर हमला कर दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसे थम गईं। इसके बाद 28 अगस्त को भी पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र में गांव धनौरा निवासी 56 वर्षीय अजीत सिंह पर गाय ने हमला कर दिया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इन घटनाओं ने शहरवासियों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

कर्मचारियों को धमकाकर सरेआम छुड़ाए गए पशु

दो लोगों की मौत के बाद जागे प्रशासन ने 13 अगस्त को शहर में मवेशी पकड़ने का अभियान दोबारा शुरू किया था, लेकिन यह अभियान महज़ औपचारिकता बनकर रह गया। ठेकेदार देवेंद्र की टीम जब भी सड़कों पर मवेशी पकड़ने उतरती है, दबंग पशुपालक मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को सरेआम धमकाते हैं।

कभी वैन का शटर खोलकर तो कभी रस्सियां काटकर पशुओं को जबरन छुड़ा ले जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा है।

नाममात्र की कार्रवाई और अधूरी गिरफ्तारियां

मृतक प्रताप सिंह के मामले में ठेकेदार की शिकायत पर शहर थाने में तीन स्थानीय पशुपालकों—इंद्र गुर्जर, मलखान गुर्जर और परसा गुर्जर—के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने 30 अगस्त को कार्रवाई करते हुए परस राम और मलखान को तो गिरफ्तार कर लिया, लेकिन मुख्य आरोपी इंद्र गुर्जर अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है।

लगातार हो रही इन घटनाओं और प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली से नाराज विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि ज्ञापन देने के बावजूद धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। पशुपालक दिनदहाड़े अपने दूध देने वाले मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं, जो हादसों का सबब बन रहे हैं।

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