चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी ने उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए यूके की हेडन ग्रीन फाउंडेशन के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट (एसईएम) की स्थापना और संचालन किया जाएगा। साथ ही नवाचार और उद्यमिता से जुड़े डिजिटल पाठ्यक्रमों को तकनीक आधारित मॉडल के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग की उपस्थिति में समझौते पर यूनिवर्सिटी की ओर से रजिस्ट्रार प्रो. याजवेंदर पाल वर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर ब्रिटिश डिप्टी हाई कमीशन के प्रतिनिधि, सेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप की मानद निदेशक प्रो. सुवीरा गिल सहित कई अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।
एसईएम एक समर्पित अकादमिक मंच के रूप में काम करेगा, जहां स्टार्टअप विचारों और सामाजिक रूप से उपयोगी उद्यमों को विकसित करने में मदद दी जाएगी। विद्यार्थियों को उद्यमी सोच, इनोवेशन प्रैक्टिस और वास्तविक समस्याओं के समाधान पर संरचित प्रशिक्षण मिलेगा। एमओयू के तहत कोर्स प्रमोशन, स्टूडेंट आउटरीच, प्रतियोगिताओं और विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा। वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग ने इस मौके पर तीन क्रेडिट आधारित डिजिटल कोर्स—इनोवेटिव एंड क्रिएटिव थिंकिंग, एंटरप्रेन्योरशिप और एंटरप्रेन्योरशिप फॉर वूमेन—की शुरुआत की। प्रत्येक कोर्स आठ सप्ताह का होगा, जिसमें 45 घंटे की गाइडेड लर्निंग दी जाएगी। पाठ्यक्रम एक विशेष पीयू-एचजीएफ लर्निंग एक्सपीरियंस प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगे, जहां लाइव सेशन, इंटरएक्टिव सपोर्ट, मूल्यांकन और डिजिटल प्रमाणपत्र उपलब्ध होंगे।
प्रो. विग ने कहा कि यूनिवर्सिटी में प्री-इन्क्यूबेशन से लेकर पोस्ट-इन्क्यूबेशन तक की व्यवस्था पहले से है, लेकिन नवाचार और उद्यमिता की पढ़ाई के लिए एक व्यवस्थित तंत्र की कमी थी, जिसे अब पूरा किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एसईएम कैंपस और संबद्ध कॉलेजों में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करेगा। फाउंडेशन के चेयर एवं फाउंडर ट्रस्टी हरदेव सिंह ने कहा कि आज के एआई और वैश्विक कनेक्टिविटी के दौर में रचनात्मक सोच ही असली पहचान बनाती है। उन्होंने कहा कि उद्यमिता एक विषय नहीं, बल्कि एक सोच है, जो युवाओं को आत्मविश्वास के साथ विचारों को जमीन पर उतारने की प्रेरणा देती है।