Thought Of The Day: शब्दों में होती है असीम शक्ति, जानें क्यों सोच-समझकर बोलना है जरूरी

शब्दों में होती है असीम शक्ति, जानें क्यों सोच-समझकर बोलना है जरूरी
Thought Of The Day: इंसान को ईश्वर से मिली सबसे अनमोल सौगातों में से एक है— ‘बोलने की क्षमता’। लेकिन इस क्षमता का इस्तेमाल हम कैसे करते हैं, यह हमारे व्यक्तित्व को तय करता है। कहा जाता है कि धनुष से निकला तीर और जुबान से निकले शब्द कभी वापस नहीं आते। यही वजह है कि अनुभवी और ज्ञानी लोग हमेशा ‘तोल-मोल के बोलने’ की सलाह देते हैं। हमारे द्वारा इस्तेमाल किया गया हर एक शब्द अपने भीतर एक अलग ऊर्जा और शक्ति समेटे होता है।
जोड़ने और तोड़ने का हुनर रखते हैं शब्द
शब्दों की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां कड़वे और विचारहीन शब्द बरसों पुराने मजबूत रिश्तों को मिनटों में तार-तार कर सकते हैं, वहीं प्रेम और संवेदना से भरे शब्द किसी गहरे से गहरे जख्म पर मरहम का काम करते हैं। जब हम गुस्से या जल्दबाजी में कुछ बोल जाते हैं, तो शायद हम उस वक्त परिस्थिति से निकल जाएं, लेकिन सामने वाले के मन पर उसका असर ताउम्र के लिए रह जाता है।
मधुर वाणी: सफलता और सम्मान की कुंजी
सामाजिक जीवन में सफलता पाना हो या अपने कार्यक्षेत्र में पहचान बनानी हो, हमारी भाषा शैली सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। एक कुशल और अनुभवी व्यक्ति वही माना जाता है जो यह जानता है कि कहां, कब और कितना बोलना है। बेवजह की जुबानी जंग में उलझने के बजाय संयम से काम लेना और विचार करके अपनी बात रखना ही बौद्धिक परिपक्वता का लक्षण है।
विचार से ही जन्म लेते हैं शब्द
हम जो सोचते हैं, वही हमारी जुबान पर आता है। इसलिए शब्दों पर नियंत्रण रखने की शुरुआत हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक बनाने से होती है। जब मन में करुणा, सहानुभूति और स्पष्टता होगी, तो मुख से निकलने वाले शब्द भी हमेशा कल्याणकारी और दूसरों को प्रेरित करने वाले ही होंगे। आज के दौर में जहां हर तरफ आपाधापी और मानसिक तनाव है, वहां किसी के लिए कहे गए दो मीठे शब्द किसी वरदान से कम नहीं हैं।
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