August 23, 2026

Train Viral: ट्रेन में साबुन-टूथपेस्ट बेचने वाला वेंडर निकला 18 भाषाओं का ज्ञानी, वीडियो वायरल

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Train Viral: ट्रेन में साबुन-टूथपेस्ट बेचने वाला वेंडर निकला 18 भाषाओं का ज्ञानी, वीडियो वायरल

ट्रेन में साबुन-टूथपेस्ट बेचने वाला वेंडर निकला 18 भाषाओं का ज्ञानी, वीडियो वायरल

Train Viral: ट्रेन के सफर में अक्सर चाय-पानी, नमकीन या टूथपेस्ट बेचने वाले सामान्य वेंडर्स से हमारी मुलाकात होती है। अमूमन लोग सामान खरीदते हैं और वेंडर आगे बढ़ जाता है। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती।

ट्रेन के एक जनरल डिब्बे में साबुन और टूथपेस्ट बेच रहे एक वेंडर ने जब यात्रियों से फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करना शुरू किया, तो हर कोई हैरान रह गया। बाद में जब उसकी भाषाई समझ का खुलासा हुआ, तो लोग अपनी उंगलियां दबाने को मजबूर हो गए।

राजस्थान का रहने वाला यह शख्स बोलता है 18 से अधिक भाषाएं

इस अनूठी मुलाकात का वीडियो अक्षय मेहता नामक यूजर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया है। वीडियो में दिख रहा यह शख्स मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है, जो फिलहाल तेलंगाना के महबूबनगर में रहता है। बातचीत के दौरान जब यात्री ने उससे पूछा कि वह इतनी भाषाएं कैसे सीख गया, तो उसने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि उसके लिए 18-19 भाषाएं बोलना या समझना कोई मुश्किल काम नहीं है।

उसने बताया कि भारतीय भाषाएं आपस में काफी हद तक जुड़ी हुई हैं; जैसे बंगाली जानने की वजह से वह लगभग 40 फीसदी उड़िया और काफी हद तक असमिया भाषा भी आसानी से समझ लेता है।

पंजाबी में दिया जवाब, उज्बेक भाषा का भी बताया अनुभव

बातचीत के दौरान जब यात्री ने उससे पूछा कि क्या वह पंजाबी भी बोल सकता है, तो उसने सिर्फ ‘हां’ में जवाब नहीं दिया, बल्कि तुरंत ठेठ पंजाबी में बोलकर अपनी पकड़ साबित कर दी। उसने यह भी साझा किया कि एक समय में उसे उज्बेकिस्तान की उज्बेक भाषा भी आती थी, हालांकि लंबे समय तक अभ्यास न होने के कारण अब वह उस पर उतनी पकड़ नहीं रख पाता। ट्रेन में सफर करने वाले अलग-अलग राज्यों के यात्रियों से बातचीत करने के उसके इस रोजमर्रा के अनुभव ने उसकी भाषाई कला को और निखार दिया है।

सोशल मीडिया पर मिल रही खूब सराहना

यह वीडियो वायरल होने के बाद लोग इस वेंडर की काबिलियत की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि किसी बड़ी यूनिवर्सिटी की डिग्री के बिना केवल अनुभव और सीखने की ललक के दम पर 18-19 भाषाओं पर पकड़ बनाना अपने आप में एक मिसाल है। ट्रेन का यह साधारण सफर इस चलती-फिरती ‘भाषाओं की डिक्शनरी’ से मुलाकात के बाद यात्रियों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया।

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