Time Traveler Claim: साल 1977 से सीधे 4413 में पहुंचा शख्स, दावों में उड़ती कारें और रोबोट्स की दुनिया का खुलासा

साल 1977 से सीधे 4413 में पहुंचा शख्स, दावों में उड़ती कारें और रोबोट्स की दुनिया का खुलासा
Time Traveler Claim: सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में समय की यात्रा यानी ‘टाइम ट्रैवल’ को लेकर रहस्यमयी कहानियों की कोई कमी नहीं है। कोई अतीत के पन्नों में लौटने की बात करता है तो कोई सैकड़ों साल आगे भविष्य की झलक देखने की।
ऐसा ही एक चौंकाने वाला दावा ब्रिटेन के लीसेस्टर निवासी लुईस वॉकर का है, जो इन दिनों फिर से चर्चा में आ गया है। वॉकर के मुताबिक, वह साल 1977 में ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय (MoD) में कार्यरत था। इसी दौरान वैज्ञानिकों ने उसे बताया कि उन्होंने समय की सीमाओं को पार करने वाली तकनीक विकसित कर ली है और वे उसे 600 साल आगे भविष्य में भेजना चाहते हैं।
इंग्लिश चैनल के नीचे बना सीक्रेट बेस और त्रिभुजाकार मशीन
वॉकर का कहना था कि इस खतरनाक मिशन में सफलता की संभावना महज 50 फीसदी थी और जरा सी चूक से अंतरिक्ष व समय के भंवर में हमेशा के लिए खो जाने का खतरा था। हालांकि, ढाई लाख पाउंड की बड़ी रकम की खातिर उसने यह जोखिम मोल लिया। उसे रातों-रात एक गुप्त हेलीकॉप्टर से इंग्लिश चैनल के नीचे बनी एक अंडरग्राउंड लैब में ले जाया गया। वहां विशालकाय त्रिभुजाकार टाइम मशीन मौजूद थी। रेडिएशन से बचाने वाला खास सूट पहनाकर जैसे ही उसे मशीन में बैठाया गया, एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और आंखों के सामने सिर्फ सफेदी छा गई।
उड़ती कारें, रोबोट्स और इंसानों का नामोनिशान नहीं
जब वॉकर की आंख खुली तो वह एक वीरान अस्पताल के कमरे में था, जहां रोबोटिक आवाज ने उसे बताया कि वह साल 4413 में पहुंच चुका है। जब वह बाहर निकला तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गया। सड़कों पर रोबोट चहलकदमी कर रहे थे और हवा में कारें उड़ रही थीं, लेकिन पूरी दुनिया से इंसान गायब हो चुके थे। वॉकर के मुताबिक, वहां उसे 2030 से आया एक अन्य टाइम ट्रैवलर मिला, जिसने बताया कि साल 2028 तक यह तकनीक आम हो चुकी थी और भविष्य में इंसान पूरी तरह से टेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स में तब्दील हो चुके हैं।
बिना सबूतों के महज एक रहस्यमयी कहानी
इस पूरी हैरान कर देने वाली आपबीती को वॉकर ने साल 2018 में ‘एपेक्स टीवी’ नामक यूट्यूब चैनल पर साझा किया था, जहां उसकी पहचान छिपाने के लिए चेहरा धुंधला रखा गया था। हालांकि, किसी भी वैज्ञानिक संस्था या इतिहासकार ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है। वॉकर ने अपनी इस कथित यात्रा का न तो कोई फोटो पेश किया और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज। यही वजह है कि वैज्ञानिक समुदाय इसे महज एक काल्पनिक किस्सा या अप्रमाणित दावा ही मानता है।
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