कोटद्वार: उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार शहर में एक कपड़ों की दुकान के नाम को लेकर चला आ रहा विवाद शनिवार को उस समय गंभीर रूप ले बैठा, जब विरोध प्रदर्शन के दौरान हंगामा, नारेबाजी और सड़क जाम की स्थिति पैदा हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए हैं और स्पष्ट किया है कि शांति व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



पटेल मार्ग की ‘बाबा ड्रेस’ दुकान बना विवाद का केंद्र

कोटद्वार के पटेल मार्ग स्थित ‘बाबा ड्रेस’ नामक कपड़ों की दुकान को लेकर पिछले काफी समय से विवाद चल रहा था। बजरंग दल से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं का आरोप था कि दुकान का नाम कोटद्वार के प्रसिद्ध सिद्धबली बाबा हनुमान मंदिर से भ्रम पैदा करता है। इसी आधार पर दुकान मालिक मोहम्मद शोएब पर दुकान का नाम बदलने का दबाव बनाया जा रहा था। बताया गया कि करीब दो-ढाई महीने पहले भी इस मुद्दे को लेकर विरोध हुआ था, तब दुकान मालिक ने कथित तौर पर दुकान को नई जगह शिफ्ट करने के बाद नाम बदलने का भरोसा दिया था।



दुकान शिफ्ट होने के बाद फिर भड़का विरोध

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 10–15 दिन पहले दुकान को पुरानी जगह से लगभग 30–40 मीटर दूर नई जगह पर स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बावजूद बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने दुकान के नाम को लेकर एक बार फिर आपत्ति जताई। इसी दौरान बुधवार को दुकान के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे कार्यकर्ताओं की दुकान मालिक शोएब और उसके जिम संचालक दोस्त दीपक कुमार से कहासुनी हो गई, जो बाद में मारपीट में बदल गई।



नाम को लेकर झड़प और बढ़ता तनाव

इस झड़प के दौरान स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई, जब जिम संचालक दीपक कुमार ने कथित तौर पर अपना नाम “मोहम्मद दीपक” बताया और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने के लिए मजबूर किया। इस घटना के बाद माहौल और ज्यादा गरमा गया और मामला सोशल और धार्मिक पहचान से जोड़कर देखा जाने लगा, जिससे शहर में तनाव की स्थिति बनने लगी।



शनिवार को प्रदर्शन, नारेबाजी और सड़क जाम

शनिवार को बजरंग दल के गौरक्षा दल के प्रांत प्रमुख नरेश उनियाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एक बार फिर दुकान और जिम के बाहर प्रदर्शन के लिए पहुंच गए। इस दौरान नारेबाजी की गई, सड़क जाम की गई और कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरियर हटाकर उग्र नारेबाजी की और गाली-गलौच करते हुए सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश की।



पुलिस से धक्का-मुक्की और सरकारी कार्य में बाधा

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान करीब 30–40 अज्ञात लोगों ने पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की की और सरकारी कार्य में बाधा डाली। इससे सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। हालात को देखते हुए पुलिस ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया और किसी बड़े टकराव को टाल दिया।



तीन अलग-अलग मुकदमे, कई धाराओं में केस दर्ज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कोतवाली कोटद्वार में पुलिस की ओर से एक मामला 30–40 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा कोटद्वार निवासी वकील अहमद की तहरीर पर एक अलग मामला दर्ज किया गया है। तीसरा मुकदमा कमल पाल की शिकायत पर जिम संचालक दीपक उर्फ अक्की, विजय रावत और उनके अन्य साथियों के खिलाफ दर्ज किया गया है, जिसमें जाति-सूचक शब्दों के प्रयोग और जान से मारने की नीयत से हमले के आरोप लगाए गए हैं।



प्रशासन का सख्त रुख और शांति बनाए रखने की कोशिश

पुलिस और प्रशासन ने दो पक्षों के बीच उत्पन्न विवाद को बेहद गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और गहन जांच का भरोसा दिलाया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कोटद्वार नगर क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और फ्लैग मार्च निकालकर लोगों को शांति बनाए रखने का संदेश दिया गया। पुलिस ने साफ कहा है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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