World Rabies Day: कुत्ता काटे तो 15 मिनट का यह एक काम बचा सकता है जान, वरना 100% तय है मौत
कुत्ता काटे तो 15 मिनट का यह एक काम बचा सकता है जान, वरना 100% तय है मौत
World Rabies Day: हर साल 28 सितंबर को दुनिया भर में ‘वर्ल्ड रेबीज डे’ (World Rabies Day) मनाया जाता है, जिसका मकसद इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इस साल इस खास दिन की थीम “स्ट्रॉन्गर टुगेदर” (Stronger Together) यानी “साथ मिलकर और मजबूत” रखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ मानना है कि जब तक सरकार, स्वास्थ्य कर्मी, शिक्षक और स्थानीय समुदाय मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक इस घातक बीमारी से मुक्ति पाना नामुमकिन है। भले ही रेबीज कुछ अन्य स्तनधारी जीवों से फैल सकता है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े गवाही देते हैं कि इंसानों में 99 फीसदी मामले आवारा या पालतू कुत्तों के काटने और खरोंचने से ही फैलते हैं। 5 से 14 साल के मासूम बच्चे इसका सबसे आसान शिकार बनते हैं।
क्यों माना जाता है इसे दुनिया का सबसे खौफनाक वायरस?
रेबीज की सबसे खतरनाक बात यह है कि एक बार यदि शरीर में इसके लक्षण उभर आए, तो इसमें मृत्यु दर 100 प्रतिशत होती है। यानी लक्षण दिखने के बाद मरीज को बचाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। आमतौर पर जानवर के काटने के बाद इसके लक्षण दिखने में 2 से 3 महीने का समय लगता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वायरस ने शरीर के किस हिस्से से प्रवेश किया है। अगर घाव दिमाग या रीढ़ की हड्डी के पास है, तो लक्षण 1 हफ्ते में भी आ सकते हैं और कभी-कभी इसमें 1 साल तक का लंबा वक्त भी लग सकता है।
दो तरह का होता है रेबीज: पानी और हवा से लगने लगता है डर
इंसानों में रेबीज दो रूपों में सामने आता है। पहला और सबसे आम रूप है ‘फ्यूरियस रेबीज’ (Furious Rabies)। इसमें मरीज अत्यधिक आक्रामक हो जाता है और उसमें ‘हाइड्रोफोबिया’ और ‘एयरोफोबिया’ जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। इसके कुछ ही दिनों के भीतर मरीज की तड़प-तड़पकर मौत हो जाती है।
दूसरा रूप है ‘पैरालिटिक रेबीज’ (Paralytic Rabies), जो लगभग 20 प्रतिशत मामलों में देखा जाता है। इसमें घाव वाले हिस्से से शुरू होकर शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं। मरीज धीरे-धीरे लकवाग्रस्त (Paralyzed) हो जाता है, कोमा में चला जाता है और अंततः उसकी मौत हो जाती है।
शुरुआती लक्षण और नर्वस सिस्टम पर हमला
संक्रमण की शुरुआत में मरीज को हल्का बुखार, शरीर में दर्द और घाव वाली जगह पर असामान्य झुनझुनी, चुभन या जलन का अहसास होता है। जैसे-जैसे वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) के जरिए दिमाग और रीढ़ की हड्डी तक पहुंचता है, वहां जानलेवा सूजन पैदा कर देता है। चिकित्सा विज्ञान में आज भी लक्षण उभरने के बाद रेबीज की जांच या इसे ठीक करने का कोई सटीक इलाज मौजूद नहीं है।
जानवर के काटने पर तुरंत क्या करें? (बचाव ही एकमात्र इलाज)
चूंकि रेबीज का कोई इलाज नहीं है, इसलिए जानवर के संपर्क में आते ही उठाया गया हर कदम जिंदगी और मौत का फैसला करता है।
15 मिनट तक धोएं घाव: किसी भी आवारा या पालतू जानवर के काटने, खरोंचने या पहले से मौजूद घाव को चाटने पर तुरंत उसे नल के बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक लगातार धोएं।
तुरंत लें डॉक्टरों की सलाह: घाव मामूली हो या गहरा, बिना देर किए नजदीकी अस्पताल जाएं और डॉक्टर की सलाह पर ‘पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस’ (PEP) यानी एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स लें।
इम्यूनोग्लोबुलिन का इंजेक्शन: अगर जानवर ने स्किन पर गहरा काटा है, खून निकला है या कई जगह खरोंचें आई हैं, तो वैक्सीन के साथ घाव में ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन’ का इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य होता है।
लापरवाही न बरतें: जानवर को छूने या खाना खिलाने के बाद हाथ अच्छे से धोएं। अगर बिना खून निकले सिर्फ घर्षण हुआ है, तब भी लापरवाही न बरतें और घाव धोकर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
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