Mahendragarh News: डॉ. अर्चना गुप्ता की नई टीम में अहीरवाल नजरअंदाज, महेंद्रगढ़ को शून्य तो रेवाड़ी को सिर्फ 1 पद
डॉ. अर्चना गुप्ता की नई टीम में अहीरवाल नजरअंदाज, महेंद्रगढ़ को शून्य तो रेवाड़ी को सिर्फ 1 पद
Mahendragarh News: हरियाणा भारतीय जनता पार्टी की नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने शनिवार देर शाम अपनी नई टीम की पहली सूची जारी कर दी। इस सूची के जरिए जहां सूबे के कई नए चेहरों को संगठन में जगह देकर बदलाव का संदेश देने की कोशिश की गई, वहीं पार्टी के सबसे मजबूत सियासी किले अहीरवाल की अनदेखी ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है।
अहीरवाल के दो प्रमुख जिलों—महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी—की बात करें तो 7 विधानसभा सीटों में से 6 पर भाजपा का कब्जा है। इसके बावजूद 36 महत्वपूर्ण पदों वाली इस सूची में महेंद्रगढ़ जिले से एक भी नेता को शामिल नहीं किया गया है। दूसरी ओर, रेवाड़ी से महज विधायक लक्ष्मण यादव को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर रस्म अदायगी कर दी गई।
36 पदों की भारी-भरकम सूची, पर नारनौल से रेवाड़ी तक खाली हाथ
भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से जारी इस पहली सूची में 8 प्रदेश उपाध्यक्ष, 3 प्रदेश महामंत्री, 9 प्रदेश मंत्री, 4 कोषाध्यक्ष व कार्यालय प्रबंधक, 4 प्रवक्ता एवं मीडिया-आईटी प्रभारी, 6 मोर्चा अध्यक्ष और 2 प्रकोष्ठ प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
इस संगठनात्मक फेरबदल में फतेहाबाद, रोहतक, गुरुग्राम, झज्जर, हिसार, सोनीपत, अंबाला, यमुनानगर, जींद, पलवल, पंचकूला और कुरुक्षेत्र जैसे जिलों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। विशेष रूप से फतेहाबाद को प्रदेश उपाध्यक्ष और महामंत्री जैसे ताकतवर पदों से नवाजा गया है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि अहीरवाल जैसा पारंपरिक वोट बैंक संगठन के नक्शे पर पीछे कैसे छूट गया।
सरकार बनाने में निभाई मुख्य भूमिका, फिर भी संगठन में हिस्सेदारी नगण्य
अहीरवाल क्षेत्र साल 2014 से ही भाजपा की चुनावी ताकत का मुख्य स्तंभ रहा है। चाहे लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा, इस इलाके के मतदाताओं ने एकतरफा वोट देकर प्रदेश में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाई।
यही वजह है कि पहली सूची आते ही महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी के स्थानीय कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोगों के बीच चर्चाएं शुरू हो गई हैं। नारनौल, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी के पार्टी कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग दबी जुबान में मान रहा है कि जो इलाका पार्टी की झोली में सबसे ज्यादा सीटें डालता है, संगठन के शीर्ष पदों पर भी उसका प्रतिनिधित्व उसी अनुपात में होना चाहिए था।
दूसरी सूची से बंधी उम्मीदें या बढ़ेगा असंतोष?
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की दलील थोड़ी अलग है। संगठन से जुड़े कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल पहली सूची है और इसे अंतिम मान लेना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक आगामी सूचियों और विभिन्न मोर्चों की जिला स्तरीय टीमों में अहीरवाल के नेताओं को उचित स्थान दिया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि क्या आने वाले दिनों में आलाकमान अहीरवाल के इस सियासी असंतुलन को साध पाता है या फिर कार्यकर्ताओं की यह खामोश नाराजगी आने वाले समय में पार्टी के लिए नई चुनौती बनेगी।
