August 10, 2026

Punjab Vidhan Sabha: मानसून सत्र का आज आखिरी दिन, 65 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े बिल पर नजर

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Punjab Vidhan Sabha: मानसून सत्र का आज आखिरी दिन, 65 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े बिल पर नजर

मानसून सत्र का आज आखिरी दिन

Punjab Vidhan Sabha: पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज आखिरी दिन है और सदन में कई अहम बिलों पर चर्चा तथा उन्हें पेश किए जाने की प्रक्रिया होगी। इनमें पंजाब कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर (संशोधन) बिल, निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक से जुड़ा अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस फीस संशोधन बिल और आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ा पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सोनल बिल, 2026 प्रमुख हैं।

सबसे ज्यादा नजर करीब 65,048 आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े प्रस्ताव पर है। सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक इन्हें निजी ठेकेदारों के जरिए काम कराने की व्यवस्था से निकालकर सीधे पंजाब सरकार के अधीन कॉन्ट्रैक्ट पर लाने का रास्ता तैयार किया जाएगा। यह व्यवस्था 51 विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को प्रभावित करेगी।

 

65,048 कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा

पंजाब कैबिनेट ने मई में आउटसोर्स और सचिवालय पर नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को बदलने के लिए दो ठेकेदारों को मंजूरी दी थी। इनमें पंजाब राज्य आउटसोर्स कार्मिक (संविदा नियुक्ति में बदलाव) विधेयक, 2026 और पंजाब संविदा कार्मिक (स्वीकृत रिक्तियों के विरुद्ध आमेलन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।

प्रस्ताव के तहत ग्रुप-C और ग्रुप-D के ऐसे आउटसोर्स कर्मचारी जिन्होंने पांच साल की लगातार सेवा पूरी कर ली है, उन्हें सीधे सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर लाने का प्रावधान है। इसके बाद सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को खाली और मंजूर पदों पर नियमित कैडर में शामिल किए जाने के लिए विचार किया जा सकेगा।

सरकार के मुताबिक इस व्यवस्था के दायरे में कुल 65,048 कर्मचारी आएंगे और पहले चरण में 26 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों के लिए पांच साल के बजाय तीन साल की सेवा के बाद सीधे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट का प्रावधान बताया गया है। इनमें फायर सर्विस, PSPCL लाइनमैन, सीवर और सैनिटेशन कर्मियों सहित कुछ अन्य श्रेणियां शामिल हैं।

 

सरकार खत्म करना चाहती है ठेकेदार वाली व्यवस्था

सरकार का तर्क है कि नई व्यवस्था से कर्मचारी और सरकार के बीच सीधा संबंध बनेगा। मौजूदा मॉडल में निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम करने वाले कर्मचारियों को अब सीधे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में लाने का रास्ता बनेगा। इसका असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो वर्षों से सरकारी विभागों और संस्थानों में काम कर रहे हैं, लेकिन उनका रोजगार निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए चलता है। सरकार ने मई में कहा था कि इस बदलाव का उद्देश्य आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को खत्म करना है।

 

खैहरा बोले- बिल पढ़ने के लिए समय नहीं मिला

कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने विधानसभा में बिलों को कम समय में पेश किए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि कई बिल सदस्यों को देर से मिले, जिससे उन पर पर्याप्त अध्ययन और बहस का समय नहीं मिला।

खैहरा ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग भी उठाई। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने छह लंबित बिलों पर पर्याप्त चर्चा के लिए विधानसभा का समय बढ़ाने का आग्रह किया था।

स्पीकर ने बिलों के जारी होने की तारीखों को लेकर स्थिति स्पष्ट की और संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि भविष्य में बिल विधानसभा में पेश किए जाने से कम से कम 15 दिन पहले सदस्यों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। इससे विधायकों को प्रस्तावों का अध्ययन करने और सदन में बेहतर बहस करने का समय मिल सकेगा।

 

BDPO कुलविंदर रंधावा पर खैहरा के आरोप

सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने BDPO कुलविंदर रंधावा को लेकर भी आरोप लगाए। खैहरा ने दावा किया कि अधिकारी के खिलाफ पहले भी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं।

खैहरा के मुताबिक, जब मौजूदा पंचायत मंत्री खन्ना के विधायक थे, तब करीब 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था और इसके बाद कुलविंदर रंधावा को निलंबित किया गया था। इसके बाद अमलोह के विधायक गैरी वड़िंग ने कथित तौर पर करीब 40 लाख रुपये के गबन का मामला पकड़ा, जिसके बाद गिरफ्तारी और चार्जशीट की कार्रवाई का दावा किया गया।

खैहरा ने आरोप लगाया कि बाद में अधिकारी को फिर बहाल कर दिया गया। उन्होंने ग्रामीण विकास से जुड़े फंड में भी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए करीब 25 लाख रुपये की राशि निकाले जाने, महंगे आईफोन खरीदने और रिश्तेदारों के खातों में पैसे भेजने के आरोप लगाए। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब इस कॉपी में उपलब्ध नहीं है।

 

सत्र में सरकार और विपक्ष आमने-सामने

इस मानसून सत्र में कांग्रेस लगातार आक्रामक रुख में रही। कांग्रेस विधायक काले पटके पहनकर विधानसभा पहुंचे और पंजाब से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरा।

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए प्रस्ताव पेश किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की नीतियों को लेकर सदन में टिप्पणियां की गईं।
स्पीकर ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘फ्रेंड्स’ वाले बयान और E20 इथेनॉल-पेट्रोल जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। वहीं भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा ने पंजाब में माइनिंग और कथित अवैध खनन का मुद्दा उठाकर सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस ने इस मामले में कमेटी बनाने का सुझाव दिया।

 

आखिरी दिन हंगामे के आसार

सत्र के अंतिम दिन बिलों की संख्या और उन्हें सदन में रखने के समय को लेकर विपक्ष की आपत्ति के कारण हंगामे के आसार हैं। कांग्रेस चाहती है कि जिन विधेयकों का सीधा असर पंजाब के कर्मचारियों, युवाओं और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता है, उन पर पर्याप्त चर्चा हो। खासकर आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े दोनों विधायी प्रस्तावों पर आज की कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ते हैं तो 65,048 कर्मचारियों के लिए निजी आउटसोर्सिंग से सीधे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट और आगे नियमित पदों पर समायोजन का रास्ता तैयार होगा।

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