Haryana Sanitation Strike: हरियाणा में 15 दिनों से ठप सफाई व्यवस्था, दफ्तरों और मंत्रियों के घरों के बाहर कूड़ा फेंकने की चेतावनी

हरियाणा में 15 दिनों से ठप सफाई व्यवस्था, दफ्तरों और मंत्रियों के घरों के बाहर कूड़ा फेंकने की चेतावनी
Haryana Sanitation Strike: हरियाणा के शहरों में सफाई व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे लगभग 13 हजार सफाई कर्मचारियों और प्रदेश सरकार के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले दो हफ्तों से चल रही हड़ताल का कोई हल निकलता न देख नगरपालिका कर्मचारी संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पंचकूला में यूनियन पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार लिखित परिपत्र जारी नहीं करती, तब तक झाड़ू-कचरा उठाने की गाड़ियां बंद रहेंगी।
13 मई का समझौता और वादों की खिसकती तारीखें
नगरपालिका कर्मचारी संघ, जिला पंचकूला के प्रधान जोगिंदर सिंह ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 13 मई को सरकार के साथ बैठक में मांगों पर सहमति बनी थी, जिसे लागू करने के लिए 30 जून की समयसीमा तय की गई थी। इसके बाद सरकार ने 5 अगस्त और फिर 14 अगस्त तक का समय मांगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संघ का आरोप है कि बातचीत के तीन दौर केवल समय बिताने और कर्मचारियों को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए गए।
कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और समान काम-समान वेतन की मुख्य मांग
यूनियन की सबसे प्रमुख मांग राज्य भर में वर्षों से सेवा दे रहे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी प्रथा को पूरी तरह खत्म करना है। जोगिंदर सिंह ने कहा कि बीते 12 वर्षों में एक भी सफाई कर्मचारी को पक्का नहीं किया गया है। आज के अत्यधिक महंगाई के दौर में मात्र ₹18,300 के मासिक वेतन पर कर्मचारियों से काम कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा वेतन बढ़ोतरी के वादे के बावजूद केवल ₹2100 की एक किस्त दी गई, जिसके बाद कोई समीक्षा नहीं हुई।
अदालती आदेशों और HKRN पर उठाए सवाल
स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन (सीटू) की पंचकूला जिलाध्यक्ष रमा ने सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाना चाहिए। हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) पर तंज कसते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार जॉब सिक्योरिटी और पक्के कर्मचारियों के बराबर वेतनमान देने का दावा करती है, तो फिर कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने में हिचक क्यों दिखाई जा रही है?
मंत्रियों के चौखट तक पहुंचेगा कचरा: उग्र आंदोलन की चेतावनी
सफाई कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार के कारण हरियाणा के तमाम छोटे-बड़े शहरों में बदबू और बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने अब भी हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जाएगा। रणनीति के तहत सफाई गाड़ियों का पूरा कूड़ा सरकारी दफ्तरों, नगरपालिकाओं के प्रशासनिक परिसरों, मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के आवासों के बाहर उड़ेल दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
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