Hisar News: हिसार के गैबीपुर में स्कूल पर ताला जड़ने के बाद बड़ा एक्शन, डीसी ने सरपंच को किया सस्पेंड

हिसार के गैबीपुर में स्कूल पर ताला जड़ने के बाद बड़ा एक्शन
Hisar News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में जर्जर बुनियादी ढांचे और अध्यापकों की भारी कमी को लेकर चल रहा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पूरे मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब हिसार के उपायुक्त (DC) महेंद्रपाल ने एक्शन लेते हुए गैबीपुर गांव के सरपंच पवन मेहता को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया।
यह प्रशासनिक कार्रवाई शुक्रवार को हुए उस घटनाक्रम के ठीक बाद सामने आई है, जब गैबीपुर गांव में अध्यापकों की भारी कमी से आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकारी प्राइमरी स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया था। उस वक्त मौके पर पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) जिले सिंह और सरपंच के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने ताला खोला था। हालांकि, तालाबंदी के अगले ही दिन हुई इस कार्रवाई को सीधे तौर पर स्कूल प्रकरण और सरपंच की संदिग्ध भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।
361 बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ 3 शिक्षक, एक की बीएलओ में ड्यूटी
गैबीपुर गांव के ग्रामीणों ने अपनी लाचारी बयां करते हुए बताया कि गांव के प्राइमरी स्कूल में कुल 361 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए केवल 3 अध्यापक तैनात हैं। नियमों के मुताबिक यहां कम से कम 14 शिक्षकों की जरूरत है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब डेढ़ महीने पहले तक स्कूल में 14 अध्यापक कार्यरत थे, जिन्हें धीरे-धीरे दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया।
मौजूदा 3 शिक्षकों में से भी एक शिक्षक की ड्यूटी बीएलओ (BLO) कार्य में लगी हुई है। ऐसे में महज दो शिक्षकों पर सैकड़ों बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ मिड-डे मील की व्यवस्था संभालने का भी जिम्मा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस संबंध में शिक्षा विभाग को कई बार लिखित शिकायत दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
तकनीकी कारणों से हुआ निलंबन, लेकिन स्कूल विवाद से जुड़े तार
भले ही सरपंच के निलंबन को लेकर जारी आधिकारिक आदेश में कारण अलग दर्शाया गया है, लेकिन घटना के समय को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) बरवाला की जांच में सरपंच पर पंचायत के विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप सिद्ध हुए थे। इस मामले में उपायुक्त कार्यालय द्वारा सरपंच को 27 अक्टूबर 2025 और 26 फरवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।
नियमों के तहत सरपंच को 7 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना था, लेकिन 5 महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद उपायुक्त ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 51(1) (ख) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरपंच को पदमुक्त कर दिया। धारा 51(2) के तहत उनके पंचायत की कार्रवाई में शामिल होने पर रोक लगा दी गई है और चार्ज बहुमत रखने वाले पंच को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
हांसी और भिवानी प्रशासन सख्त, स्कूलों में बाहरी लोगों की नो-एंट्री
गैबीपुर कांड के बाद आसपास के जिलों का प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। हांसी के उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी सरकारी स्कूल परिसर में अनधिकृत या बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, ताकि पढ़ाई का माहौल खराब न हो। दूसरी ओर, भिवानी जिला प्रशासन ने भी संज्ञान लेते हुए सभी स्कूलों को जर्जर और खतरनाक कमरों में कक्षाएं न लगाने के सख्त आदेश दिए हैं और ऐसे कमरों की सूची तलब की है।
यह भी पढ़ें– सोनीपत जेल में मर्डर केस के हवालाती ने लगाया फंदा, मच गया हड़कंप
