Haryana News: फिर उफान पर यमुना! फरीदाबाद के गांवों में 3 फीट चढ़ा पानी, मंडराया बाढ़ का संकट

फिर उफान पर यमुना! फरीदाबाद के गांवों में 3 फीट चढ़ा पानी, मंडराया बाढ़ का संकट
Haryana News: पहाड़ी और ऊपरी मैदानी इलाकों में हो रही बारिश के बीच यमुना नदी एक बार फिर रौद्र रूप दिखाने लगी है। फरीदाबाद क्षेत्र से गुजर रही यमुना के जलस्तर में अचानक आई तेजी ने नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। नदी की धारा में आए उफान और तेज बहाव को देखकर स्थानीय निवासियों को पिछले वर्षों में झेली गई बाढ़ की भयावह त्रासदी की यादें ताजा होने लगी हैं।
हालात यह हैं कि तटीय इलाकों में रहने वाले लोग खुद ही नदी के पानी के स्तर पर नजर रखे हुए हैं और स्थिति बिगड़ने की सूरत में सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख करने का मन बनाने लगे हैं।
महज कुछ घंटों में 3 फीट तक चढ़ा पानी, ग्रामीणों में हड़कंप
यमुना किनारे रहने वाले लोगों की मानें तो नदी के मिजाज में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है। स्थानीय निवासी सुभाष ने बताया कि महज तीन से चार घंटे के अंतराल में नदी का जलस्तर दो से तीन फीट तक बढ़ गया है। पानी के रंग और उसकी रफ्तार को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीछे से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है या ऊपरी इलाकों का जलस्तर अचानक बढ़ा है।
तटीय इलाकों में बसे लोगों को डर है कि अगर अगले कुछ घंटों तक पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो नदी का रुख सीधे रिहायशी बस्तियों और खेतों की तरफ हो जाएगा।
“करीब दो साल पहले भी जब यमुना उफान पर आई थी, तब देखते ही देखते हमारे घरों में कई-कई फीट पानी भर गया था। हमें रातों-रात अपना सारा सामान छोड़कर बच्चों के साथ ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी। इस बार भी जलस्तर का यही रुख रहा तो हम दोबारा कोई जोखिम नहीं लेंगे और समय रहते घर खाली कर देंगे।”
— सन्नी, स्थानीय निवासी, फरीदाबाद
पशुओं, अनाज और जरूरी सामान को बचाना सबसे बड़ी चुनौती
यमुना तटीय गांवों में बाढ़ की आशंका के साथ ही सबसे बड़ा संकट मवेशियों (पशुओं) और गृहस्थी के सामान को बचाने का खड़ा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पानी अचानक बस्तियों में घुसता है, तो बुजुर्गों, बच्चों, पालतू मवेशियों और जरूरी कागजातों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर ले जाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम बन जाता है।
अक्सर बाढ़ आने के बाद प्रशासन की तरफ से राहत कार्य शुरू होते हैं, लेकिन तब तक खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी होती हैं और घरों को भारी नुकसान पहुंच चुका होता है। यही वजह है कि ग्रामीण इस बार प्रशासन से पहले ही पुख्ता कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से मुनादी और राहत टीमों को अलर्ट रखने की मांग
यमुना किनारे बसे दर्जनों गांवों के निवासियों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि यमुना के जलस्तर और हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए। यदि जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचता है, तो निचले इलाकों में समय रहते मुनादी कराई जाए या मैसेज के जरिए अलर्ट जारी किया जाए।
इसके अलावा, ग्रामीणों ने मांग की है कि एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय नाव चालकों की टीमों को पहले से ही तैनात या अलर्ट मोड पर रखा जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत बचाव कार्य शुरू किया जा सके। फिलहाल, आने वाले 24 से 48 घंटे फरीदाबाद के यमुना तटीय इलाकों के लिए बेहद नाजुक माने जा रहे हैं।
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