September 3, 2026

Yamunanagar News: 5G के दौर में 90s वाला मंजर! यमुनानगर के नवाजपुर में एक कॉल के लिए चलना पड़ता है 4 KM पैदल

0
Yamunanagar News: 5G के दौर में 90s वाला मंजर! यमुनानगर के नवाजपुर में एक कॉल के लिए चलना पड़ता है 4 KM पैदल

5G के दौर में 90s वाला मंजर! यमुनानगर के नवाजपुर में एक कॉल के लिए चलना पड़ता है 4 KM पैदल

Yamunanagar News: एक तरफ जहां देश 5G नेटवर्क के पंखों पर सवार होकर डिजिटल इंडिया और गांव-गांव इंटरनेट पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बसा एक गांव आज भी ‘ब्लैकआउट’ जैसी स्थिति झेलने को मजबूर है। यमुनानगर जिले के छछरौली क्षेत्र में स्थित नवाजपुर गांव की लगभग 850 की आबादी 21वीं सदी में भी मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी जरूरत के लिए तरस रही है। हालत यह है कि घर में बैठकर एक सामान्य फोन कॉल करना भी यहां के लोगों के लिए किसी लग्जरी से कम नहीं है।

गांव में किसी भी निजी या सरकारी टेलीकॉम कंपनी का टावर न होने के कारण मोबाइल में सिग्नल न के बराबर आते हैं। गांव के निवासी संजय गुर्जर बताते हैं कि अगर किसी को जरूरी फोन कॉल करनी हो या बाहर से आने वाला कोई महत्वपूर्ण फोन रिसीव करना हो, तो उसे गांव से 3 से 4 किलोमीटर दूर मुख्य सड़क की ओर जाना पड़ता है। कई बार लोग ऊंची-ऊंची छतों पर जाकर हाथ में मोबाइल उठाए नेटवर्क तलाशते नजर आते हैं, लेकिन वहां भी सिग्नल इतना स्थिर नहीं रहता कि दो मिनट शांति से बात हो सके।

UPI ठप, व्हाट्सएप होमवर्क अधूरा: बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा का जीवन प्रभावित

मोबाइल नेटवर्क के इस अघोषित संकट ने गांव के सामाजिक और आर्थिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। आज के समय में जहां परचून की दुकान से लेकर अस्पताल तक हर जगह UPI और ऑनलाइन बैंकिंग का बोलबाला है, वहीं नवाजपुर के लोग डिजिटल भुगतान करने से पूरी तरह महरूम हैं। किसी रिश्तेदार की तबीयत अचानक खराब हो जाए या कोई आकस्मिक दुर्घटना हो जाए, तो समय पर एंबुलेंस या परिजनों से संपर्क साधना किसी पहाड़ चढ़ने जैसा हो जाता है।

इस नेटवर्क विहीन व्यवस्था का सबसे दुखद पहलू बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। स्कूलों में आजकल अधिकांश होमवर्क, प्रोजेक्ट वर्क और जरूरी सूचनाएं व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भेजी जाती हैं। गांव की छात्रा दृष्टि का कहना है कि घर पर नेटवर्क न रहने के कारण पढ़ाई का काफी नुकसान होता है। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जब गांव से बाहर जाना पड़ता है, तो सुरक्षा और संपर्क को लेकर माता-पिता की चिंता अलग से बढ़ जाती है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वे इस ‘डिजिटल युग’ के हिस्सेदार कब बनेंगे?

80% घरों में WiFi का मजबूरी वाला कनेक्शन, पंचायत जमीन देने को तैयार; SDM ने दिया आश्वासन

मोबाइल कनेक्टिविटी के इस सूखे से निपटने के लिए ग्रामीणों ने अपनी जेब ढीली कर वैकल्पिक रास्ता निकाला है। गांव के 70 से 80 फीसदी घरों में लोगों ने ब्रॉडबैंड और वाई-फाई कनेक्शन लगवा रखे हैं। कुछ परिवारों ने तो दो-दो अलग-अलग कंपनियों के कनेक्शन ले रखे हैं ताकि एक का नेटवर्क जाने पर दूसरे से काम चलाया जा सके। हालांकि, वाई-फाई केवल घर के दायरों तक सीमित रहता है। जैसे ही कोई किसान खेत में जाता है या ग्रामीण घर से बाहर निकलता है, वह दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। ऊपर से मोबाइल रिचार्ज और वाई-फाई का दोहरा खर्चा ग्रामीणों की जेब पर भारी पड़ रहा है।

सरपंच प्रतिनिधि संजीव कुमार का कहना है कि पंचायत की ओर से विधायकों, सांसदों और BSNL अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं। लेकिन अधिकारियों का तर्क रहता है कि गांव की आबादी कम होने के कारण नया टावर लगाना व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं है। संजीव कुमार का कहना है कि गांव वाले किसी भी कंपनी को टावर लगाने के लिए मुफ्त जमीन देने तक को तैयार हैं। वहीं मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद छछरौली के SDM जसपाल गिल ने आश्वस्त किया है कि संबंधित टेलीकॉम कंपनियों से बात कर नवाजपुर गांव की इस समस्या का शीघ्र ही स्थाई समाधान निकाला जाएगा।

यह भी पढ़ें–  जींद के सफाखेड़ी में भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़, 95 हजार में तय हुआ था सौदा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed