Unique Buildings World: नीचे से नहीं, ऊपर से बनी थी यह अनोखी इमारत, बिजली के प्लग जैसा है डिजाइन

नीचे से नहीं, ऊपर से बनी थी यह अनोखी इमारत, बिजली के प्लग जैसा है डिजाइन
Unique Buildings World: इंजीनियरिंग और वास्तुकला की दुनिया में जब भी किसी इमारत का खाका खिंचता है, तो निर्माण का नियम एक ही होता है— नींव से शुरुआत और फिर एक-एक करके मंजिलों का आसमान की तरफ बढ़ना। लेकिन स्पेन की राजधानी मैड्रिड के प्लाजा दे कोलोन (Plaza de Colón) में खड़ी एक इमारत इस नियम को सरेआम चुनौती देती नजर आती है। साल 1976 में बनकर तैयार हुई ‘टोरेस डे कोलोन’ (Torres de Colón) यानी कोलंबस टावर्स का निर्माण उल्टी दिशा में हुआ था। यह इमारत नीचे से ऊपर नहीं, बल्कि ऊपर से नीचे की ओर बनकर तैयार हुई थी।
आसमान में तैरते किसी विशालकाय बिजली के प्लग जैसी दिखने के कारण स्थानीय लोग इसे प्यार से ‘El Enchufe’ (द प्लग) कहकर पुकारते हैं। हालांकि, इसके हरे रंग के आर्ट डेको स्टाइल और कॉपर-स्मोक्ड ग्लास की वजह से इसकी खूबसूरती पर जानकारों की राय बंटी रही, लेकिन इसके निर्माण के अनोखे तरीके ने पूरी दुनिया के इंजीनियर्स को हैरान कर दिया।
कैसे मुमकिन हुआ ‘उल्टा’ निर्माण?
इस गगनचुंबी इमारत को बनाने के लिए पारंपरिक तरीकों को दरकिनार कर दिया गया। सबसे पहले जमीन पर कंक्रीट के दो बेहद मजबूत मुख्य खंभे (सेंट्रल पिलर्स) खड़े किए गए। इसके बाद मंजिलों का काम नीचे से शुरू करने के बजाय, सीधे सबसे ऊपरी मंजिल का ढांचा तैयार किया गया। इस ऊपरी मंजिल को बेहद मजबूत स्टील केबल्स के सहारे ऊपर टांग दिया गया।
इसके बाद अगली निचली मंजिल बनाई गई और उसे भी केबल के जरिए ऊपर टंगी मंजिल से जोड़ दिया गया। इसी तरह एक-एक करके नीचे की ओर मंजिलें लटकती गईं और पूरी इमारत बनकर तैयार हो गई। हालांकि, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने के लिए इमारत के बेसमेंट और शुरुआती कुछ निचले तलों का निर्माण पारंपरिक तरीके यानी नीचे से ऊपर की ओर ही किया गया था।
‘प्लग’ नाम के पीछे की कहानी और वैश्विक तकनीक
इमारत के शीर्ष पर बनी विशेष संरचना और बीच के दो लंबे खंभों का कॉम्बिनेशन दूर से देखने पर बिल्कुल बिजली के सॉकेट में लगे प्लग जैसा अहसास कराता है। वक्त के साथ यह नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि इस इमारत की आधिकारिक पहचान ही ‘द प्लग’ के रूप में स्थापित हो गई।
गौरतलब है कि ‘उल्टी इमारत’ बनाने का यह प्रयोग सिर्फ मैड्रिड तक ही सीमित नहीं रहा। आयरलैंड के डबलिन में स्थित ‘सेंट्रल बैंक ऑफ आयरलैंड’ और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग का ‘स्टैंडर्ड बैंक सेंटर’ भी इसी केबल-सस्पेंडेड तकनीक से बनाए गए हैं।
इसके अलावा पोलैंड के व्रोकला (Wrocław) शहर में 1960 के दशक में ‘ट्रज़ोनोलिनोविएक’ (Trzonolinowiec) नाम की इमारत बनी, जिसे स्थानीय लोग ‘हैंगिंग मैन’ कहते हैं। 1950 के दशक में रूस और नीदरलैंड्स में ‘जैकब्लॉक’ (Jackblock) तकनीक विकसित हुई, जिसमें सबसे ऊपरी मंजिल को पहले जमीन पर तैयार करके हाइड्रोलिक जैक से ऊपर उठाया जाता था और फिर उसके नीचे अगली मंजिल फिट की जाती थी।
इंजीनियरिंग की यह उल्टी तकनीक न सिर्फ भारी निर्माण सामग्री को बार-बार ऊंचाई पर ले जाने की मशक्कत से बचाती थी, बल्कि वास्तुकला के इतिहास में नए आयाम भी स्थापित कर गई।
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