Karnal News: 28 दिन से हड़ताल पर सफाई कर्मचारी, निगमायुक्त के अल्टीमेटम पर 10 कर्मियों ने कराया मुंडन

28 दिन से हड़ताल पर सफाई कर्मचारी 10 कर्मियों ने कराया मुंडन
Karnal News: (मुनीश मुंडे) प्रदेश भर में अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे सफाई कर्मचारियों का आंदोलन करनाल में और अधिक उग्र रूप लेता जा रहा है। हड़ताल के 28वें दिन शुक्रवार को प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने सरकार के रवैये के खिलाफ ‘मुंडन दिवस’ मनाकर अपना कड़ा आक्रोश जताया। धरनास्थल पर नारेबाजी के बीच 10 सफाई कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से अपना मुंडन करवाया और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक उनकी जायज मांगें धरातल पर पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।
कर्मचारियों की सबसे मुख्य मांग लंबे समय से सेवाएं दे रहे कच्चे सफाई कर्मचारियों को पक्का करना है। कर्मचारियों का कहना है कि वे कई वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर शहर की सफाई का जिम्मा संभाल रहे हैं, लेकिन सरकार केवल आश्वस्त करने तक ही सीमित है।
निगमायुक्त के ‘तुगलकी फरमान’ से भड़का आक्रोश, आर-पार की लड़ाई के मूड में आए कर्मचारी
तनाव उस समय और बढ़ गया जब नगर निगम आयुक्त की ओर से हड़ताली कर्मचारियों को 5 सितंबर तक ड्यूटी पर लौटने का सख्त निर्देश जारी कर दिया गया। आदेश में साफ कहा गया है कि तय समयसीमा तक काम पर न लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नगर पालिका सफाई कर्मचारी संघ के प्रधान राजकुमार ने इस प्रशासनिक आदेश को ‘तुगलकी फरमान’ करार देते हुए कहा कि सरकार एक तरफ मांगों को जायज मानती है और दूसरी तरफ कार्रवाई का डर दिखा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने के बजाय कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। सरकार चाहे जो भी दंडात्मक कार्रवाई कर ले, मांगें पूरी हुए बिना कोई भी सफाई कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेगा।
शहर में जगह-जगह सड़ांध मार रहे कूड़े के ढेर, वैकल्पिक व्यवस्था भी हुई पस्त
लगातार एक महीने से जारी इस हड़ताल के चलते करनाल शहर की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों के मोड़ पर कचरे के पहाड़ खड़े हो चुके हैं, जिससे उठती दुर्गंध ने राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है।
हालांकि जिला प्रशासन और नगर निगम ठेकेदारों के जरिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाकर सफाई कराने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ये तमाम कोशिशें ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही हैं। आने वाले दिनों में यदि वार्ता के जरिए हल नहीं निकला, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
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