September 5, 2026

Janmashtami Bengaluru: बेंगलुरु में कृष्ण जन्म महामहोत्सव, सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि बोले- मुश्किलों में कभी हार न मानें

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Janmashtami Bengaluru: बेंगलुरु में कृष्ण जन्म महामहोत्सव, सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि बोले- मुश्किलों में कभी हार न मानें

बेंगलुरु में कृष्ण जन्म महामहोत्सव

Janmashtami Bengaluru: बेंगलुरु के द पैलेस ग्राउंड्स स्थित रॉयल सीनेट में शुक्रवार रात कृष्ण जन्म महामहोत्सव का आयोजन किया गया। सिद्धेश्वर वर्ल्ड फाउंडेशन के बेंगलुरु केंद्र और सिद्धेश्वर सनातन संसार, ब्रह्मऋषि आश्रम, तिरुपति के तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि की मौजूदगी में हुए आयोजन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, उनके जीवन दर्शन और सनातन संस्कृति से जुड़े आध्यात्मिक संदेशों को केंद्र में रखा गया। पूरे परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक माहौल रहा।

 

मुश्किलों में हार न मानने का संदेश

सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि मनुष्य को जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, व्यक्ति को धैर्य, विश्वास और मुस्कान के साथ उनका सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां व्यक्ति की परीक्षा लेती हैं, लेकिन आगे वही बढ़ता है जो परेशानियों से घबराने के बजाय उनसे सीखता है और समाधान की दिशा में काम करता है। उनके मुताबिक, समस्या पर लगातार चिंता करने के बजाय उसके समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

 

क्रोध और चिंता से मन की शांति होती है प्रभावित

ब्रह्मऋषि ने कहा कि क्रोध, चिंता, ईर्ष्या, अहंकार और दूसरों की बातों से लगातार दुखी रहने की प्रवृत्ति मन की शांति को प्रभावित करती है। उन्होंने लोगों से अपने भीतर की नकारात्मकता को कम करने और मन को शांत व सकारात्मक रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में व्यक्ति के सामने दो रास्ते होते हैं—या तो वह भगवान को छोड़ दे या खुद को भगवान पर छोड़ दे। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आस्था बनाए रखने और ईश्वर पर विश्वास मजबूत करने का संदेश दिया।

 

‘प्रेम’ को लेकर कही यह बात

सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि ने प्रेम के स्वरूप पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रेम को संकीर्ण नजरिए से देखने के बजाय इसे जीवन की पवित्र अनुभूति के रूप में समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रेम राधेश्याम है, प्रेम सीताराम है और प्रेम महावीर का नाम है। उनके अनुसार, मनुष्य को जीवन में प्रेम, करुणा, सेवा, समर्पण और त्याग के भाव को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चा प्रेम व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है।

 

धन और पद से ज्यादा जरूरी संतोष

ब्रह्मऋषि ने कहा कि गरीबों की जरूरतें पूरी हो सकती हैं, लेकिन सम्राटों की इच्छाएं भी अधूरी रह सकती हैं। उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक सुख केवल धन और वैभव में नहीं, बल्कि प्रेम, संतोष और आत्मिक शांति में है। उन्होंने मीरा और राधा के उदाहरण के जरिए प्रेम और समर्पण की बात रखी। उनके अनुसार, जीवन में प्रेम की भावना को गलत आचरण से अलग करके समझना चाहिए और प्रेम को करुणा, त्याग, सेवा तथा समर्पण से जोड़कर देखना चाहिए।

 

उपलब्धियों पर अहंकार न करने की सलाह

सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि ने कहा कि व्यक्ति को अपनी वस्तुओं, उपलब्धियों, पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति पर अहंकार नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, जीवन में हासिल होने वाली चीजों के पीछे ईश्वर की कृपा के साथ कई ऐसी परिस्थितियां भी होती हैं, जिन्हें व्यक्ति हमेशा देख नहीं पाता। उन्होंने लोगों से विनम्र रहने और ईश्वर का स्मरण करते रहने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि संसार परिवर्तनशील है, इसलिए व्यक्ति को बाहरी परिस्थितियों के बजाय अपनी आंतरिक चेतना और ईश्वर पर विश्वास मजबूत करना चाहिए।

 

संस्था का उद्देश्य शिक्षा, सेवा और साधना

कार्यक्रम के दौरान सिद्धेश्वर वर्ल्ड फाउंडेशन और सिद्धेश्वर सनातन संसार के उद्देश्यों पर भी बात की गई। ब्रह्मऋषि ने कहा कि संस्था का उद्देश्य शिक्षा, सेवा और साधना के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान देती है, सेवा उसके भीतर मानवता का भाव विकसित करती है और साधना उसे अपने वास्तविक स्वरूप तथा परमात्मा से जोड़ती है। उनके अनुसार इन तीनों के संतुलन से व्यक्ति और समाज के विकास की दिशा मजबूत हो सकती है।

 

कृष्ण के जीवन दर्शन से जुड़े संदेश

महामहोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं और उनके संदेशों के आध्यात्मिक एवं मानवीय पहलुओं को याद किया गया। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के जीवन को धर्म, सत्य, प्रेम, करुणा और कर्तव्य के मूल्यों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़े मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में भागीदारी की।

 

बेंगलुरु टीम ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी

आयोजन की सफलता में सरला बोथरा, रमेश सांखला, इंदु राठौर, हापुराम माली, पारसमल सिरवी, सुनील आहूजा, नवीन गिडिया, संगीता केजरीवाल और हस्तीमल मालवया सहित बेंगलुरु टीम की भूमिका रही। श्रद्धालुओं की भागीदारी और धार्मिक प्रस्तुतियों के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ। आयोजकों के अनुसार, कृष्ण जन्म महामहोत्सव का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन के साथ प्रेम, सेवा और सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश लोगों तक पहुंचाना रहा।

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