Punjab DGP Appointment : High Court ने पंजाब सरकार से मांगा हलफनामा, प्रदेश में 4 साल से स्थायी DGP नहीं

High Court ने पंजाब सरकार से मांगा हलफनामा, प्रदेश में 4 साल से स्थायी DGP नहीं
Punjab DGP Appointment |High Court | पंजाब में शीर्ष पुलिस कमान की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संवैधानिक सवाल खड़ा हो गया है। राज्य में पिछले लगभग चार वर्षों से स्थायी आधार पर पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति न होने का मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। अदालत ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है।
इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने की। अदालत ने पंजाब सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर, 2026 को तय की है।
‘अतिरिक्त प्रभार के भरोसे व्यवस्था चलाना चिंताजनक’
वकील निखिल थम्मन की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सीमावर्ती राज्य पंजाब में पुलिस बल के प्रमुख का पद इतने लंबे समय से महज ‘अतिरिक्त प्रभार’ पर चलाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक स्वायत्तता से खिलवाड़ है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब तक पुलिस प्रमुख को निश्चित कार्यकाल के साथ स्थायी रूप से नियुक्त नहीं किया जाता, तब तक पुलिस कमान में वह स्वतंत्रता, स्थिरता और प्रभावशीलता नहीं आ सकती जो एक पेशेवर बल के लिए आवश्यक है। स्थायी डीजीपी होने से न केवल नीतिगत फैसले निर्भीक होकर लिए जा सकते हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर आम जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन?
याचिका में शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक फैसलों को आधार बनाते हुए पंजाब सरकार की वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2006 के बहुचर्चित ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसके तहत राज्यों में डीजीपी की पारदर्शी नियुक्ति के लिए यूपीएससी (UPSC) के जरिए एक तय प्रक्रिया निर्धारित की गई थी।
इसके अलावा, 13 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी उन स्पष्ट आदेशों का भी हवाला दिया गया है, जिनमें किसी भी राज्य में ‘कार्यकारी या अस्थायी डीजीपी’ बनाने की परिपाटी पर सख्त रोक लगाई गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पंजाब में चल रही वर्तमान व्यवस्था इन न्यायिक दिशा-निर्देशों की सीधी अवहेलना करती है।
UPSC का पैनल मिलने के बाद भी फैसला पेंडिंग
याचिका में दावा किया गया है कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से योग्य आईपीएस अधिकारियों की सूची (पैनल) तैयार करके पहले ही पंजाब सरकार को भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने अब तक नियमित डीजीपी के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
याचिकाकर्ता ने बताया कि इस विषय पर ध्यान आकर्षित करने के लिए 24 अगस्त, 2026 को संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को एक विधिक नोटिस भी भेजा गया था, लेकिन कोई सकारात्मक कदम न उठाए जाने के बाद ही उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। अब 1 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी होंगी कि सरकार इस बाबत अदालत में क्या सफाई पेश करती है।

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