Punjab power crisis : रोपड़ थर्मल प्लांट का तीसरा यूनिट भी बंद, अघोषित कटों से लोग परेशान

रोपड़ थर्मल प्लांट का तीसरा यूनिट भी बंद, अघोषित कटों से लोग परेशान
Punjab Power Crisis : पंजाब में बिजली का संकट एक बार फिर विकराल रूप धारण करता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से राज्य में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट के आंकड़े को पार कर रही है, लेकिन इसके मुकाबले उत्पादन लगातार लड़खड़ा रहा है।
सरकारी थर्मल प्लांटों में तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस के अभाव के चलते आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि एक तरफ जहां ग्रामीण और शहरी इलाकों में अघोषित कट लग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जर्जर बिजली सप्लाई लाइनों के कारण बाजारों में हादसों का खतरा मंडराने लगा है।
रोपड़ थर्मल प्लांट के तीन यूनिट ठप
संकट की मुख्य वजह सरकारी थर्मल प्लांटों की बदहाल स्थिति है। मंगलवार दोपहर बाद से रोपड़ थर्मल प्लांट के दो यूनिट बंद चल रहे थे, और स्थिति तब और बिगड़ गई जब बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे तीसरा यूनिट भी ठप हो गया।
इस प्लांट की कुल क्षमता 840 मेगावाट है, लेकिन वर्तमान में यहां बमुश्किल 200 मेगावाट के आसपास ही बिजली का उत्पादन हो पा रहा है। जो यूनिट चालू हैं, वे भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं, जिसका सीधा असर राज्य की पावर ग्रिड पर पड़ रहा है।
बाजारों में स्पार्किंग और लोगों का गुस्सा
उत्पादन घटने के साथ-साथ मेंटेनेंस की कमी ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। लुधियाना के व्यस्त चौड़ा बाजार स्थित हजूरी रोड पर मंगलवार देर रात बिजली के तारों में भयानक स्पार्किंग हुई, जिसके बाद पूरे इलाके की लाइट गुल हो गई। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि कपड़ों की इस घनी मार्केट में तारों का मकड़जाल फैला हुआ है, जहां थोड़ी सी हवा या नमी से चिंगारी निकलने लगती है।
पूरी रात बिजली गायब रहने और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा फोन न उठाए जाने से लोगों में भारी रोष है। इसी व्यवस्था के खिलाफ आज शिरोमणि अकाली दल लुधियाना के डीसी दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन करने जा रहा है।
मांग और सप्लाई का बढ़ता फासला
पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के सामने इस समय मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटना बड़ी चुनौती बन गया है। प्राइवेट थर्मल प्लांटों की बात करें तो तलवंडी साबो और राजपुरा प्लांट आंशिक रूप से राहत दे रहे हैं, जहां कुल क्षमता के मुकाबले करीब 1,300-1,300 मेगावाट बिजली बन रही है।
हाइड्रो प्रोजेक्ट्स रात के समय 830 मेगावाट तक सहयोग कर रहे हैं, लेकिन दिन में इसे घटाना पड़ता है। वहीं, सोलर प्रोजेक्ट्स रात में पूरी तरह शून्य रहते हैं। इस भारी कमी से निपटने के लिए PSPCL को मजबूरी में केंद्रीय पूल से करीब 11,700 मेगावाट महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है, फिर भी स्थिति पूरी तरह संभल नहीं पाई है।
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