September 25, 2026

Haryana Farmers Protest: भिवानी में सूखे की मार से त्रस्त किसानों का डीसी दफ्तर पर प्रदर्शन, 50 हजार मुआवजे की उठी मांग

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Haryana Farmers Protest: भिवानी में सूखे की मार से त्रस्त किसानों का डीसी दफ्तर पर प्रदर्शन, 50 हजार मुआवजे की उठी मांग

Haryana Farmers Protest: हरियाणा के भिवानी जिले में इस बार कुदरत की बेरुखी और प्रशासनिक उपेक्षा ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है। जिलेभर में पड़े भीषण सूखे से खड़ी फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। इसी जनसमस्या को लेकर उद्वेलित किसानों ने बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय किसान सभा (Kisan Sabha Bhiwani) के नेतृत्व में जिला मुख्यालय (Bhiwani DC Office Protest) के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अगले दो से तीन दिनों में उनकी जायज मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

तोशाम और सिवानी में भयंकर संकट, चारे के भाव पहुंचे आसमान पर

धरने की अगुवाई कर रहे किसान नेता दयानंद ने बताया कि पूरा भिवानी जिला इस समय भीषण सूखे की चपेट में है। खासकर तोशाम और सिवानी (Tosham Siwani Drought) इलाकों की स्थिति तो बेहद चिंतनीय हो चुकी है। नहरों में अंतिम छोर (टेल) तक पानी न पहुंचने की वजह से खेतों में पककर तैयार हो रही फसलें दो-तीन दिनों के भीतर सूखकर (Crop Damage Compensation Haryana) खाक होने की कगार पर हैं। यही नहीं, खेतों में पानी न होने से पशुओं के हरे-सूखे चारे का संकट खड़ा हो गया है और चारे के भाव 1000 रुपये प्रति क्विंटल (Bajra MSP Price Haryana)  से भी ऊपर निकल गए हैं।

पिछली बार बाढ़ की तबाही, इस बार सूखे का कहर: किसानों की चार मुख्य मांगें

किसान सभा के नेताओं—मास्टर जगरोशन और कामरेड ओमप्रकाश ने कहा कि भिवानी का किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। पिछले साल जहां जलभराव और बाढ़ ने फसलों को लील लिया था, वहीं इस साल सूखे ने मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों ने प्रशासन के सामने मुख्य रूप से चार मांगें रखी हैं— भिवानी को अविलंब सूखाग्रस्त घोषित करना, ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ व क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलकर विशेष गिरदावरी करवाना, 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देना, और नहरों में टेल तक पर्याप्त पानी व खाद की तुरंत व्यवस्था करना।

मंडियों में MSP से कम दाम पर बिक रहा बाजरा, टॉवर लाइनों के नाम पर धक्केशाही रोकने की अपील

प्रदर्शनकारी किसानों ने मंडियों में फसलों की खरीद व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकारी दावे के बावजूद मंडियों में बाजरा 2250 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल के मामूली भाव पर बिक रहा है, जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2925 रुपये के करीब है। इससे किसानों को सीधे तौर पर प्रति क्विंटल 600 से 650 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा, खेतों से गुजर रही बिजली की हाईटेंशन टॉवर लाइनों के एवज में किसानों को उचित मुआवजा न दिए जाने का मुद्दा उठाते हुए धक्केशाही रोकने की मांग की गई है।

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