SIR विवाद में महुआ मोइत्रा ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दी पुलिस में शिकायत, जानिए क्या हैं पूरा मामला
महुआ मोइत्रा पहुंचीं थाने, CEC ज्ञानेश कुमार पर शिकायत
Kolkata Political Update: टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा गुरुवार को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचीं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और IT सिस्टम के जरिए मतदाता सूची में ऐसे बदलाव किए गए, जिन पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने इसे आपराधिक आचरण बताते हुए पुलिस से शिकायत दर्ज करने की बात कही। मोइत्रा का यह कदम ऐसे समय आया है जब Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है। खासतौर पर Form-6 में SIR से जुड़ा नया सवाल जोड़े जाने और आयोग के भीतर कथित मतभेद को लेकर बहस तेज हुई है। हालांकि, इन आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया है। आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में किसी एक अधिकारी के स्तर पर निर्णय लिए जाने की बात को खारिज किया है और कहा है कि आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए जाते हैं।
तीन सदस्यीय आयोग में कथित मतभेद का मुद्दा
महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के तीन सदस्यीय ढांचे का हवाला देते हुए कहा कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य फैसलों में नियंत्रण और संतुलन बनाए रखना है। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर ज्ञानेश कुमार से जुड़े फैसलों या आदेशों पर आपत्ति जताई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मौकों पर एक ही दिन में कई आपत्तियां दर्ज की गईं। यह दावा 23 सितंबर को सामने आई इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से जुड़ा है। रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से SIR और मतदाता सूची से संबंधित कुछ फैसलों पर लिखित आपत्तियों का जिक्र किया गया था। चुनाव आयोग ने हालांकि इन रिपोर्टों में बताए गए मतभेदों को लेकर अलग पक्ष रखा है। आयोग का कहना है कि उसके निर्णय संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और तीनों आयुक्त निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
Form-6 में SIR का सवाल जोड़ने पर विवाद
विवाद का एक प्रमुख हिस्सा Form-6 से जुड़ा है। यह फॉर्म नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी नए मतदाता के पंजीकरण के लिए Form-6 की व्यवस्था उपलब्ध है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, Form-6 में एक नया सवाल जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से पूछा गया कि क्या उसका नाम पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची में था। इसके अलावा माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में होने से जुड़ा विकल्प भी शामिल किया गया था। महुआ मोइत्रा ने इसी बदलाव को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर यह सवाल उठाया था कि निर्धारित नियमों में बदलाव किए बिना Form-6 में ऐसा नया प्रावधान कैसे जोड़ा गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आपत्तियों के बावजूद यह सवाल कुछ समय तक सिस्टम में मौजूद रहा।
वोटर लिस्ट में ERO और BLO की भूमिका पर सवाल
महुआ मोइत्रा ने मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव की प्रक्रिया में स्थानीय चुनाव अधिकारियों की भूमिका का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि Electoral Registration Officer यानी ERO और Booth Level Officer यानी BLO मतदाता सूची से जुड़े काम में अहम भूमिका निभाते हैं। मोइत्रा का आरोप है कि केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से इन स्थानीय अधिकारियों की भूमिका सीमित हुई और मतदाता सूची में बदलाव का नियंत्रण ज्यादा केंद्रीकृत हो गया। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, मतदाता सूची से जुड़े कामों में ERO और BLO की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। आयोग का पोर्टल मतदाताओं को अपने निर्वाचन क्षेत्र, मतदान केंद्र, ERO और BLO की जानकारी हासिल करने की सुविधा भी देता है। वहीं, SIR से जुड़ी मतदाता सूची का डेटा उपलब्ध कराने के लिए आयोग ने अपना ऑनलाइन पोर्टल भी जारी किया है। आयोग के अनुसार, पुराने SIR रिकॉर्ड राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त डेटा के आधार पर उपलब्ध कराए गए हैं।
महुआ ने IT सिस्टम के जरिए वोटर लिस्ट में बदलाव का लगाया आरोप
पुलिस शिकायत के दौरान मोइत्रा ने चुनाव आयोग के IT सिस्टम को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सॉफ्टवेयर के केंद्रीकृत इस्तेमाल से मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया ऐसी व्यवस्था के तहत हुई, जिसमें स्थानीय स्तर के अधिकारियों की भूमिका को दरकिनार किया गया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना, हटाना या उसमें सुधार करना चुनावी प्रक्रिया का बेहद संवेदनशील हिस्सा है। ऐसे में सिस्टम में किए गए किसी भी बदलाव का रिकॉर्ड और उसकी जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए। हालांकि, मोइत्रा की ओर से लगाए गए इन आरोपों और उनके कानूनी आधार की जांच अब संबंधित पुलिस और अन्य सक्षम संस्थाओं के स्तर पर होगी। केवल शिकायत दर्ज होने का मतलब आरोपों का सही साबित होना नहीं है।
SIR को लेकर पहले से जारी है राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। विपक्षी दल मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 के तहत मतदाताओं को अपना नाम पुराने SIR रिकॉर्ड में खोजने की सुविधा दी गई है। आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार और हटाने से जुड़े अलग-अलग आवेदन और सेवाएं भी उपलब्ध कराई हैं। यानी विवाद का एक अहम सवाल यह है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और नियमों के अनुरूप रही। इसी मुद्दे पर विपक्षी नेताओं की आपत्तियां और चुनाव आयोग का जवाब आमने-सामने हैं।
महुआ मोइत्रा की शिकायत के बाद अब पुलिस के स्तर पर यह देखा जाएगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। शिकायत में जिन दस्तावेजों, आदेशों और IT सिस्टम से जुड़े बदलावों का हवाला दिया गया है, उनकी जांच इस मामले में अहम हो सकती है। इस पूरे विवाद में फिलहाल तीन अलग-अलग स्तर के तथ्य सामने हैं। पहला, Form-6 में SIR से संबंधित सवाल जोड़े जाने की रिपोर्ट। दूसरा, दो चुनाव आयुक्तों की ओर से इस बदलाव और कुछ अन्य फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट। और तीसरा, चुनाव आयोग का यह पक्ष कि संस्थागत फैसले आयोग की प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। आगे की जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में से किन बातों पर कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई बनती है।
