September 29, 2026

Farmers News: कुरुक्षेत्र में धान खरीद पर दोहरी मार, दूसरे जिलों में बिक्री पाबंदी पर भड़के चढ़ूनी

0
Farmers News: कुरुक्षेत्र में धान खरीद पर दोहरी मार, दूसरे जिलों में बिक्री पाबंदी पर भड़के चढ़ूनी

कुरुक्षेत्र में धान खरीद पर दोहरी मार, दूसरे जिलों में बिक्री पाबंदी पर भड़के चढ़ूनी

Farmers News: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में धान की सरकारी खरीद का आगाज तो हो गया है, लेकिन इसके साथ ही अन्नदाता के लिए मुसीबतों का नया दौर भी शुरू हो चुका है। एक ओर जहां राज्य सरकार द्वारा दूसरे जिलों की मंडियों में धान बेचने पर लगाई गई पाबंदी ने किसानों के विकल्प सीमित कर दिए हैं, वहीं पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने खुले में पड़ी फसल के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। भाकियू (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने इस अव्यवस्था को लेकर सरकार और मंडी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

दूसरे जिलों में फसल बेचने की मिले छूट, अधिकारियों से हुई वार्ता

मंडी का दौरा करने पहुंचे भाकियू प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि इस बार धान की खरीद प्रक्रिया पहले ही देरी से शुरू हुई है। ऐसे में दूसरे जिलों की मंडियों में धान बेचने पर पाबंदी लगाना किसानों के साथ सरासर नाइंसाफी है। चढ़ूनी ने बताया कि इस मुद्दे पर प्रशासनिक अधिकारियों से सीधी बातचीत हुई है और उन्होंने जल्द से जल्द व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर समय रहते जिला सीमा की यह बंदिश न हटाई गई, तो किसान दोबारा सड़कों पर उतरकर अपना हक मांगने को मजबूर होंगे।

बारिश ने बढ़ाई 17% नमी की टेंशन, खुले में सड़ने की कगार पर उपज

जिले की मंडियों में 26 सितंबर से 17 प्रतिशत नमी वाले धान के गेट पास कटने शुरू हुए थे। लेकिन अचानक बदले मौसम और बेमौसम बारिश ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अगर बारिश से ढेरी में नमी का स्तर 17 फीसदी से ऊपर जाता है, तो सरकारी खरीद एजेंसियां उसे खरीदने से हाथ खड़े कर लेंगी। चढ़ूनी ने आरोप लगाया कि खरीद शुरू करने में हुई प्रशासनिक देरी के कारण मंडियों में धान का अंबार लग गया। अब बारिश से खुले में पड़ा अनाज खराब हो रहा है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है।

मंडियों से उठान ठप, राइस मिलों और गोदामों में जगह बनाने की मांग

किसान नेता ने इस बात पर गहरा रोष जताया कि जितना धान तोल दिया गया है, उसका बड़ा हिस्सा अभी भी मंडियों के फड़ों पर ही पड़ा हुआ है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि राइस मिलर्स से तुरंत बातचीत कर धान को सीधे मिलों और गोदामों में भेजने के इंतजाम किए जाएं। चढ़ूनी ने भावुक होते हुए कहा, “अनाज केवल किसी किसान की निजी प्रॉपर्टी नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है। अगर बारिश में यह सड़ता है, तो इसका सीधा नुकसान राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को होगा।”

जिम्मेदारी तय हो, ताकि भविष्य में न दोहराई जाए ऐसी लापरवाही

गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने सरकार से मांग की है कि मंडियों में धान के रख-रखाव और समय पर उठान में ढिलाई बरतने वाले अफसरों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि हर साल खरीद सीजन में एक जैसी अव्यवस्था देखने को मिलती है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को तुरंत प्रभाव से तिरपाल, वाटरप्रूफ शेड, त्वरित उठान और निर्बाध खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होगी, ताकि मंडियों में खड़े किसान को अपनी खून-पसीने की कमाई का सही दाम मिल सके।

यह भी पढ़ें–  गेट पास न बनने से भड़का किसान, मंडी दफ्तर पर ताला जड़ माचिस निकालकर दी आत्मदाह की धमकी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed