October 2, 2026

Yamunanagar Stubble Burning: यमुनानगर में पराली जलाने पर इस सीजन की पहली FIR, तीन भाइयों पर दर्ज हुआ केस, MSP पर फसल बिक्री बंद

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Yamunanagar Stubble Burning: यमुनानगर में पराली जलाने पर इस सीजन की पहली FIR, तीन भाइयों पर दर्ज हुआ केस, MSP पर फसल बिक्री बंद

यमुनानगर में पराली जलाने पर इस सीजन की पहली FIR, तीन भाइयों पर दर्ज हुआ केस, MSP पर फसल बिक्री बंद

Yamunanagar Stubble Burning: हरियाणा में धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। यमुनानगर जिले में सरकारी रोक और सख्त दिशा-निर्देशों के बावजूद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। (Haryana Parali News)  उपमंडल रादौर के थाना छप्पर क्षेत्र अंतर्गत गांव मंधार में कृषि विभाग के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए खेत में पराली जलाने के आरोप में तीन सगे भाइयों पर मामला दर्ज किया गया है। चालू सीजन में पराली जलाने को लेकर जिले में दर्ज यह पहली प्राथमिकी है, जिससे किसानों में हड़कंप मच गया है।

जिला प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाना पड़ा भारी

कृषि विभाग की शिकायत के मुताबिक, जिला उपायुक्त द्वारा यमुनानगर के सभी इलाकों में फसल अवशेषों को जलाने पर पूरी तरह से धारा-144 व अन्य प्रशासनिक नियमों के तहत पाबंदी लगाई गई है।

इसके बावजूद गांव मंधार के रहने वाले हरजीत सिंह, ओंकार सिंह और अवतार सिंह ने अपने खेत में कटी हुई धान की पराली को आग के हवाले कर दिया। सैटेलाइट इमेजिंग और स्थानीय नोडल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर कृषि विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया और छप्पर थाना पुलिस को कानूनी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। पुलिस ने तीनों भाइयों के खिलाफ सरकारी आदेशों की अवहेलना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रेड एंट्री से लेकर 5,000 जुर्माना: न बिकेगी फसल, न मिलेगा फायदा

मामले की जानकारी देते हुए उप कृषि निदेशक (Dr Aditya Dabas DDA Yamunanagar) डॉ. आदित्य डबास ने बताया कि पराली में आग लगाने वाले किसानों पर सिर्फ पुलिस केस ही नहीं, बल्कि भारी आर्थिक व व्यावहारिक प्रतिबंध भी लगाए जा रहे हैं। (Yamunanagar Police Chhapar Police Station) नियम के मुताबिक पराली जलाने पर संबंधित किसान से 5,000 रुपये का सीधा जुर्माना वसूला जाता है।

इसके अलावा, किसान के ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल खाते में ‘रेड एंट्री’ दर्ज कर दी जाती है, जिससे उसका खाता पूरे एक साल के लिए ब्लॉक हो जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि संबंधित किसान अगले एक साल तक अपनी कोई भी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी मंडियों में नहीं बेच सकेगा।

“पर्यावरण और मिट्टी दोनों को नुकसान”, कृषि विभाग ने की किसानों से अपील

डॉ. आदित्य डबास ने कहा कि हरियाणा देश का इकलौता ऐसा राज्य है, जो किसानों को पराली न जलाने और उसके उचित प्रबंधन (इन-सीटू व एक्स-सीटू) के लिए विभिन्न यंत्रों व वित्तीय प्रोत्साहनों पर भारी सब्सिडी देता है। इसके बावजूद कुछ लोग नियमों को ताक पर रखकर ऐसा कदम उठाते हैं।

उन्होंने किसानों से भावनात्मक और व्यावहारिक अपील करते हुए कहा कि पराली के धुएं से न केवल इंसान, बुजुर्ग और छोटे बच्चे बीमारियों का शिकार होते हैं, बल्कि खेतों में मौजूद मित्र कीट जल जाते हैं और जमीन की उपजाऊ क्षमता (उर्वरक शक्ति) भी खत्म हो जाती है।

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