August 2, 2026

Savita Punia Padma Shri Award: सिरसा की बेटी सविता पूनिया को मिला पद्मश्री

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Savita Punia Padma Shri Award: सिरसा की बेटी सविता पूनिया को मिला पद्मश्री

Savita Punia Padma Shri Award: सिरसा की बेटी सविता पूनिया को मिला पद्मश्री

Savita Punia Padma Shri Award: हरियाणा के सिरसा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया भर में भारत का डंका बजाने वाली हॉकी स्टार सविता पूनिया के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है।

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित गरिमामयी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सविता पूनिया को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से अलंकृत किया। भारतीय महिला हॉकी टीम की रीढ़ और मौजूदा गोलकीपर सविता को खेल की दुनिया में उनके अदम्य साहस और बेमिसाल प्रदर्शन के लिए यह अवॉर्ड दिया गया है। मैदान पर विरोधी टीमों के पसीने छुड़ाने वाली सविता को भारतीय हॉकी की “द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया” भी कहा जाता है।

जब लगा कि हॉकी छूट जाएगी, तब परिवार बना ढाल

इस ऐतिहासिक पल पर भावुक होते हुए सविता पूनिया ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार हाथ में हॉकी थामी थी, तब सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन देश का इतना बड़ा सम्मान उनके हाथों में होगा। उन्होंने अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपने परिवार, गुरुओं और साथी खिलाड़ियों को दिया।

सविता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके करियर में कई ऐसे मोड़ आए जब लगा कि अब सब खत्म हो गया और शायद हॉकी छोड़नी पड़ेगी, लेकिन उनके परिवार का भरोसा कभी नहीं डिगा। उन्होंने कहा कि एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की के लिए देश के शीर्ष पायदान पर पहुंचना यह साबित करता है कि अगर बेटियों को सही मायनों में परिवार का साथ मिले, तो वे आसमान छू सकती हैं।

टोक्यो ओलंपिक का वो ऐतिहासिक मैच, जिसने बदल दी किस्मत

सविता पूनिया का अंतरराष्ट्रीय करियर वैसे तो शानदार रहा है, लेकिन उन्हें वैश्विक स्तर पर असली पहचान साल 2021 में हुए टोक्यो ओलंपिक के दौरान मिली। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए उस ऐतिहासिक क्वार्टर फाइनल मुकाबले को कोई नहीं भूल सकता, जहां सविता ने विरोधी टीम के एक के बाद एक कुल 8 पेनल्टी कॉर्नर नाकाम कर भारतीय टीम को जीत की दहलीज पर खड़ा किया था।

इस करिश्माई गोलकीपिंग के बाद ही पूरी खेल बिरादरी ने उन्हें “द ग्रेट वॉल” का खिताब दिया था। उनकी कप्तानी में ही भारत ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स (2022) में कांस्य पदक जीता और एफआईएच नेशंस कप का खिताब अपने नाम किया था। वह महान गोलकीपर पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली इकलौती भारतीय गोलकीपर हैं।

दादा की प्रेरणा से जोधकां गांव से शुरू हुआ था सफर

11 जून 1990 को सिरसा के जोधकां गांव में जन्मी सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह स्वास्थ्य विभाग से बतौर फार्मासिस्ट रिटायर हैं और मां लीलावती गृहिणी हैं।

सविता अपने दादा रणजीत सिंह को अपना असली रोल मॉडल मानती हैं, जिनकी जिद और प्रेरणा के चलते उन्होंने खेल की दुनिया में कदम रखा था। सविता ने हॉकी की शुरुआती बारीकियां सिरसा की अग्रसेन नर्सरी में सीखीं और बाद में अपनी प्रतिभा को धार देने के लिए वे हिसार के साई (SAI) सेंटर चली गईं। साल 2007 में उनके टैलेंट को देखते हुए पहली बार सीनियर राष्ट्रीय कैंप में जगह मिली और 2011 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया। बता दें कि सविता इससे पहले 2018 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुकी हैं और वह सिरसा जिले में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी हैं।

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