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रेलवे में डिजिटल भ्रष्टाचार! अंबाला कैंट पर व्यापारी से अवैध वसूली, निजी खाते में डलवाए पैसे

May 13, 2026 2:42 PM

अंबाला। उत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त जंक्शनों में शुमार अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन का पार्सल कार्यालय इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन वजह कोई उपलब्धि नहीं बल्कि 'अवैध वसूली' का संगीन आरोप है। एक व्यापारी से वैज्ञानिक उपकरणों की बुकिंग के एवज में तय सरकारी किराए से लगभग दोगुना पैसा वसूलने का मामला सामने आया है। बड़ी बात यह है कि यह वसूली नकद नहीं, बल्कि डिजिटल तरीके से एक निजी खाते में कराई गई, जिसके सबूत अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

तय भाड़ा 869, जेब से ढीले करवाए 1500 रुपये

पूरा मामला जतिन श्रीवास्तव नामक एक व्यापारी से जुड़ा है। जतिन ने अंबाला से महाराष्ट्र के नांदेड़ के लिए वैज्ञानिक उपकरणों का एक कंसाइनमेंट बुक कराया था। रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक पार्सल वे-बिल (नंबर बी-2735459) के अनुसार, इस बुकिंग का कुल सरकारी भाड़ा 869 रुपये तय किया गया था। लेकिन आरोप है कि पार्सल कार्यालय में तैनात स्टाफ ने रसूख दिखाते हुए उन पर दबाव बनाया और जबरन 1500 रुपये की मांग की।

डिजिटल पेमेंट ने खोली सिस्टम की पोल

भ्रष्टाचार के इस खेल में सबसे चौंकाने वाला पहलू भुगतान का तरीका रहा। आमतौर पर ऐसी अवैध वसूली नकद में की जाती है ताकि कोई सबूत न रहे, लेकिन यहां हौसले इतने बुलंद थे कि अतिरिक्त राशि एक निजी व्यक्ति के बैंक खाते में डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर करवाई गई। पीड़ित व्यापारी ने जब सरकारी रसीद और 1500 रुपये के डिजिटल ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट आपस में मिलाया, तो गड़बड़झाला साफ हो गया।

सोशल मीडिया पर शिकायत के बाद रेलवे में हड़कंप

अपनी मेहनत की कमाई को इस तरह लुटता देख जतिन ने चुप रहने के बजाय सबूतों के साथ सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने रेल मंत्रालय, उत्तर रेलवे और डीआरएम अंबाला को टैग करते हुए डिजिटल पेमेंट के स्क्रीनशॉट साझा कर दिए। सोशल मीडिया पर यह मामला आते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जतिन ने मांग की है कि पार्सल कार्यालय में चल रहे इस सिंडिकेट की जांच की जाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।

अंबाला कैंट स्टेशन पहले भी पार्सल बुकिंग में धांधली और सामान की सुरक्षा को लेकर विवादों में रहा है, लेकिन सीधे तौर पर डिजिटल एविडेंस के साथ वसूली का यह मामला अधिकारियों के लिए गले की फांस बन सकता है। अब देखना यह होगा कि रेल मंत्रालय इस 'डिजिटल भ्रष्टाचार' पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।


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