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5जी मशीनों से लैस होंगे हरियाणा के राशन डिपो, 100 करोड़ का टेंडर जारी; कम तौलने वालों की खैर नहीं

May 13, 2026 3:50 PM

हरियाणा। हरियाणा के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में एक बड़े डिजिटल बदलाव की पटकथा लिख दी गई है। पिछले 10 सालों से राशन डिपो पर नेटवर्क की समस्या और बायोमीट्रिक मशीनों के 'हैंग' होने से परेशान हो रहे लाभार्थियों के लिए राहत की खबर है।

खस्ताहाल 2जी मशीनों के कारण सर्वर का जो सिरदर्द करीब 1.59 करोड़ लाभार्थियों और डिपो धारकों को झेलना पड़ता था, अब उसका समाधान 5जी स्पीड से होगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 100 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ प्रदेश के करीब 9300 राशन डिपो को हाई-टेक करने की तैयारी पूरी कर ली है।

अब अंगूठा नहीं, चेहरा बनेगा पहचान

अक्सर देखा जाता था कि बुजुर्गों या मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के फिंगरप्रिंट घिस जाने के कारण बायोमीट्रिक मशीनें उन्हें पहचान नहीं पाती थीं, जिससे उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता था। नई 5जी मशीनों में 'फेस रीडिंग' की सुविधा दी गई है, जिससे लाभार्थी का चेहरा स्कैन होते ही सत्यापन (Verification) हो जाएगा।

इसके अलावा, राशन की तौल में होने वाली हेराफेरी को रोकने के लिए विभाग ने मशीनों को सीधे इलेक्ट्रॉनिक कांटों से लिंक कर दिया है। यानी अब डिपो धारक जितना तौल मशीन में दर्ज होगा, उतना ही राशन मशीन स्लिप में दिखाएगी, जिससे 'कम राशन' की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

वितरण की सुस्त रफ्तार पर चढ़ा तकनीक का रंग

हालांकि, तकनीकी बदलाव के इस दौर में वर्तमान वितरण प्रणाली पर थोड़ा असर जरूर पड़ा है। ऑल राशन डिपो होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के मीडिया प्रभारी गुरतेज सिंह सोढ़ी ने बताया कि मशीनों के अपडेशन और पुराने 2जी नेटवर्क की विफलता के चलते इस महीने वितरण की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है।

मई माह के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के करीब 40 लाख राशन कार्डों में से अब तक मात्र 5.15 लाख कार्डधारकों (लगभग 12.90%) को ही राशन मिल सका है। विभाग का दावा है कि जैसे ही 31 मई तक सभी डिपो पर 5जी मशीनें पूरी तरह सक्रिय होंगी, यह प्रक्रिया न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह पारदर्शी भी हो जाएगी।

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