6 जून को अंबाला को दहलाने की साजिश, धमकी भरे ईमेल के बाद अलर्ट पर खुफिया एजेंसियां, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
Jun 02, 2026 6:02 PM
अंबाला। हरियाणा का अंबाला जिला एक बार फिर अज्ञात साइबर आतंकियों के निशाने पर है। पिछले कुछ महीनों से देश के अलग-अलग कोनों में स्कूलों और हवाई अड्डों को मिल रही फर्जी धमकियों का सिलसिला अब अंबाला के मुख्य प्रशासनिक और सार्वजनिक केंद्रों तक पहुंच गया है। इस बार अंबाला पुलिस के आधिकारिक इनबॉक्स में आए एक ईमेल ने खुफिया तंत्र के कान खड़े कर दिए हैं। खुद को 'खालिस्तान नेशनल आर्मी' का नुमाइंदा बताने वाले किसी अज्ञात शख्स ने इस मेल के जरिए सीधे तौर पर अंबाला शहर नगर निगम, अंबाला कोर्ट परिसर और उत्तर भारत के सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन्स में शुमार अंबाला कैंट स्टेशन को बम से उड़ाने की खुली चुनौती दी है। मेल सामने आते ही खाकी वर्दी में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सुरक्षा की समीक्षा के लिए बैठकों का दौर शुरू हो गया।
6 जून की तारीख और समय के खिलाफ रेस; दावों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
आतंक के इस नए डिजिटल पैंतरे में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात वह डेडलाइन है, जो मेल भेजने वाले ने तय की है। धमकी में कहा गया है कि 6 जून को इन तीनों जगहों पर एक साथ सिलसिलेवार धमाके किए जाएंगे। इस अल्टीमेटम के बाद से अंबाला की फिजाओं में दहशत का साया साफ महसूस किया जा सकता है। पुलिस प्रशासन हालांकि पूरी तरह मुस्तैद होने और स्थिति नियंत्रण में होने का दम भर रहा है। संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है और संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है। लेकिन आम जनता के जेहन में यह सवाल बार-बार कौंध रहा है कि क्या वाकई हमारी सुरक्षा अभेद्य है या फिर यह हर बार की तरह केवल एक तात्कालिक प्रशासनिक प्रतिक्रिया है?
जांच के नाम पर वही रटा-रटाया ढर्रा, मास्टरमाइंड तक पहुंचने में नाकाम रही खाकी
इस पूरे मामले का सबसे कमजोर पहलू अंबाला पुलिस की तकनीकी तफ्तीश है। यह पहली बार नहीं है जब जिले के किसी संस्थान को इस तरह डराने की कोशिश की गई हो, लेकिन हर बार पुलिस के आला अधिकारी एक ही रटा-रटाया बयान जारी कर देते हैं कि "मामले की गहनता से जांच की जा रही है और आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।" हकीकत यह है कि हफ्तों बीत जाने के बाद भी पुलिस की साइबर सेल इन ईमेल्स के पीछे बैठे असली चेहरों का नकाब उतारने में पूरी तरह नाकाम रही है। कोर्ट परिसर की सुरक्षा का जिम्मा स्थानीय पुलिस के पास है और नगर निगम में होमगार्ड्स की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं, वहीं कैंट स्टेशन की सुरक्षा के लिए जीआरपी और आरपीएफ (RPF) संयुक्त रूप से सर्च अभियान चला रही हैं, मगर यह सारी कवायद केवल जमीन पर दिख रही है, वर्चुअल वर्ल्ड में पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं।
खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर, लेकिन जनता के मन में सुलग रहे हैं कई अनुत्तरित सवाल
फिलहाल स्थानीय पुलिस इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए राज्य और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों (IB) के साथ लगातार संपर्क में है। वीपीएन (VPN) और डार्क वेब के जरिए भेजे गए इस तरह के ईमेल्स को ट्रेस करना पुलिस की टेक्निकल टीम के लिए समय के खिलाफ एक बेहद पेचीदा और बड़ी रेस बन चुका है। 6 जून की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, बाजार और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। सवाल जस का तस बना हुआ है कि आखिर इन धमकियों का सिलसिला कब थमेगा? जब तक इन ईमेल्स को भेजने वाले असली गुनहगारों को बेनकाब नहीं किया जाता, तब तक सुरक्षा के ये भारी-भरकम दावे कागजी ही नजर आएंगे।