Haryana Ex MLA Fraud: हरियाणा के पूर्व विधायक छौक्कर की सुप्रीम कोर्ट में खिंचाई: 36 करोड़ की संपत्ति पर 90 करोड़ लौटाने का दावा कैसे?
Jun 20, 2026 3:49 PM
हरियाणा। राजनैतिक रसूख और रियल एस्टेट के गठजोड़ से उपजे महिरा ग्रुप घोटाले में फंसे समालखा के पूर्व कांग्रेस विधायक धर्म सिंह छौक्कर को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। सलाखों के पीछे बंद पूर्व विधायक ने जेल से बाहर आने के लिए अदालत के सामने घर खरीदारों का पैसा लौटाने और प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का जो खाका खींचा था, अदालत ने उसकी व्यावहारिक सच्चाई पर ही उंगली उठा दी है। सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच ने छौक्कर के उस प्रस्ताव को पूरी तरह विरोधाभासी माना है, जिसमें उन्होंने कम संपत्ति होने के बावजूद एक बड़ी रकम चुकाने का दावा किया था।
36 करोड़ की संपत्ति और 90 करोड़ का वादा: अदालत ने पकड़ा 'झोल'
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ के सामने जब छौक्कर की जमानत पर बहस शुरू हुई, तो अदालत ने उनके वित्तीय ब्योरे को गहराई से खंगाला। सुनवाई के दौरान पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक, छौक्कर और उनके बेटों की कुल घोषित संपत्तियों की कीमत महज 36 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। ऐसे में यह बात गले नहीं उतरती कि वे घर खरीदारों की देनदारी चुकाने के लिए 90 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि कहां से और किस स्रोत से लेकर आएंगे? कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि इस अतिरिक्त धनराशि के इंतजाम का कोई ठोस जरिया नहीं बताया गया है।
जब्त संपत्तियों को छुड़ाने की 'शर्त' पर भी नाराजगी
छौक्कर ने बीते 18 जून को कोर्ट में सौंपे अपने हलफनामे में एक शर्त रखी थी कि अगर जांच एजेंसियों द्वारा कुर्क (Freeze) की गई उनकी परियोजनाओं की संपत्तियों को मुक्त कर दिया जाए, तो वे महिरा होम्स-68 और 103 प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर देंगे। साथ ही महिरा होम्स-104 के पीड़ित खरीदारों के नुकसान की भरपाई के लिए 90 करोड़ रुपये जमा करा देंगे। अदालत ने इस शर्त को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह किसी स्वतंत्र स्रोत से पैसा लौटाने की मंशा नहीं है, बल्कि जांच को प्रभावित करने और अपनी फंसी हुई संपत्तियों को निकालने का एक जरिया मात्र है।
616 करोड़ का घोटाला और हजारों खरीदारों की गाढ़ी कमाई का सौदा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के मुताबिक, महिरा ग्रुप की कंपनियों ने गुरुग्राम के सेक्टर-68, 103 और 104 में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के नाम पर हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों से फ्लैट देने का वादा कर करोड़ों रुपये बटोरे थे। आरोप है कि इस प्रोजेक्ट के पैसे को निर्माण कार्य में लगाने के बजाय अन्य शेल कंपनियों और निजी संपत्तियां खरीदने में डायवर्ट कर दिया गया। जांच एजेंसी इस मामले में करीब 616 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूत होने का दावा कर रही है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम और छौक्कर के प्रस्ताव पर ईडी को 13 जुलाई 2026 तक अपना पक्ष रखने को कहा है, जिसके बाद अब इस मामले की अगली अहम सुनवाई 17 जुलाई को होगी।