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Chitra Sarwara Ambala: चित्रा सरवारा पहुंचीं चूना चौक जामा मस्जिद, मुस्लिम समाज को गले लगाकर दी ईद की बधाई

May 28, 2026 2:07 PM

अंबाला। त्याग, समर्पण और अकीदत का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) अंबाला में पूरी शिद्दत और भाईचारे के साथ मनाया गया। इस मुबारक मौके पर सियासत और समाज के बीच की दूरियों को पाटते हुए हरियाणा की तेजतर्रार युवा नेत्री और अंबाला छावनी की बेटी चित्रा सरवारा ने एक खूबसूरत पहल की। वह त्योहार की खुशियों में शरीक होने के लिए खुद अंबाला छावनी के चूना चौक स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद पहुंचीं। वहां उन्होंने नमाज के बाद बाहर आ रहे अकीदतमंदों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उन्हें गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।

मौलवी असगर कासमी से की मुलाकात, समाज ने जताया आभार

मस्जिद परिसर पहुंचने पर चित्रा सरवारा ने जामा मस्जिद अंबाला के सम्मानित मौलवी मोहम्मद असगर कासमी से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने मौलवी साहब को गुलदस्ता भेंट कर समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान मस्जिद परिसर और आसपास के इलाके में मौजूद मुस्लिम समाज के बुजुर्गों और युवाओं ने अंबाला की बेटी को अपने बीच पाकर बेहद खुशी जताई। लोगों ने बेहद गर्मजोशी, खुले दिल और पारंपरिक सम्मान के साथ उनका इस्तकबाल किया। इस मुलाकात के दौरान स्थानीय सामाजिक ताने-बाने और आपसी रिश्तों को और मजबूत करने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

'अनेकता में एकता ही हिंदुस्तान की असली रूह और खूबसूरती है'

इस मौके पर मीडिया और वहां मौजूद लोगों से रूबरू होते हुए चित्रा सरवारा ने बेहद भावुक और विचारणीय संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारे देश भारत की सबसे बड़ी ताकत और इसकी आत्मा यहां की विविधता में छिपी एकता है।

उन्होंने आगे जोड़ा, "हम एक ऐसे मुल्क के बाशिंदे हैं जहां अनगिनत मजहब, बोलियां, संस्कृतियां और रस्म-ओ-रिवाज एक साथ फलते-फूलते हैं। तमाम विविधताओं के बाद भी जब हम एक-दूसरे के तीज-त्योहारों और सुख-दुख में बराबर के साझीदार बनते हैं, तो वह मंजर पूरी दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। यही साझा चूल्हा-चौका और गंगा-जमुनी तहजीब हमारी सभ्यता की सबसे बड़ी खूबसूरती है, जिसे हमें हर हाल में महफूज रखना है।"

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