अयोध्या और केदारनाथ के बाद अब वैष्णो देवी मिशन पर आगरा की वंशिका, शाहबाद में हुआ जोरदार स्वागत
Jun 08, 2026 4:25 PM
शाहाबाद। उत्तर भारत में इस समय सूरज आग उगल रहा है। पारा रिकॉर्ड तोड़ रहा है और लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। लेकिन, इसी तपती धूप और जानलेवा गर्म हवाओं के बीच, आगरा के शिकोहाबाद की रहने वाली महज 9 साल की वंशिका ने अपने अदम्य साहस से सबको हैरत में डाल दिया है। पैरों में पहिए (स्केट्स) बांधकर यह नन्हीं खिलाड़ी माता वैष्णो देवी के दरबार की ओर बढ़ रही है। आगरा से जम्मू के कटरा तक का करीब 1000 किलोमीटर का यह सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, जिसे वंशिका बेहद मुस्कुराते हुए पार कर रही हैं।
रोज 90 किलोमीटर का सफर, शाहबाद में हुआ जोरदार स्वागत
वंशिका ने अपनी इस साहसिक यात्रा की शुरुआत बीती 2 जून को की थी। उनका लक्ष्य 14 जून तक माता वैष्णो देवी के भवन पहुंचने का है। इस सफर में वह अकेली नहीं हैं; उनका हौसला बढ़ाने के लिए आगरा के ही दो और प्रतिभावान खिलाड़ी– 17 साल के मेदांत और 16 साल के आदित्य भी साथ चल रहे हैं। ये तीनों स्केटर्स इस भीषण गर्मी में भी हर दिन लगभग 90 किलोमीटर की हैरतअंगेज दूरी तय कर रहे हैं।
सफर के दौरान जब यह दल कुरुक्षेत्र के शाहबाद पहुंचा, तो वहां के लाडवा चौक पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने फूलों के हार पहनाकर और नारे लगाकर इन तीनों बच्चों का स्वागत किया और उनकी इस दृढ़ इच्छाशक्ति को सलाम किया।
भाई के स्केट्स से शुरू हुआ सफर, दीवार के सहारे सीखी स्केटिंग
अपनी इस दीवानगी और जुनून के बारे में बात करते हुए वंशिका बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही स्केटिंग का बेहद शौक था। घर में जब वह अपने बड़े भाई को स्केटिंग करते देखती थीं, तो उनके मन में भी यह तमन्ना जागी। शुरुआत में उनके पास खुद के स्केट्स नहीं थे, तो वह भाई के बड़े स्केट्स पहनकर दीवार के सहारे संतुलन बनाना सीखती थीं। बेटी के इस हुनर को देखकर पिता ने उनकी पीठ थपथपाई और फिर कड़े अभ्यास का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने वंशिका को लंबी दूरी की स्केटिंग (लॉन्ग डिस्टेंस स्केटिंग) का माहिर खिलाड़ी बना दिया।
केदारनाथ और अयोध्या भी नाप चुकी हैं वंशिका
यह पहली बार नहीं है जब वंशिका ने ऐसा कोई चमत्कारी कारनामा किया हो। इतनी छोटी सी उम्र में वह पहले भी आस्था और स्पोर्ट्स के इस अनोखे संगम को जी चुकी हैं। इससे पहले वह स्केटिंग करते हुए ही उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम (राम मंदिर) और उत्तराखंड के दुर्गम रास्तों को पार कर बाबा केदारनाथ के दर्शन भी कर चुकी हैं। वंशिका, मेदांत और आदित्य की यह तिकड़ी आज उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है, जो छोटी-छोटी मुश्किलों के आगे घुटने टेक देते हैं।