सावधान! भिवानी में पेट्रोल खत्म होने की खबर निकली अफवाह, पंपों पर मची अफरा-तफरी
Mar 27, 2026 5:44 PM
भिवानी। भिवानी की सड़कों पर शुक्रवार को नजारा कुछ बदला-बदला और तनावपूर्ण नजर आया। जिले के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही वाहनों की ऐसी कतारें लगीं कि मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई। दरअसल, सोशल मीडिया और आपसी चर्चाओं में यह अफवाह जंगल की आग की तरह फैल गई कि आने वाले दिनों में पेट्रोल की भारी किल्लत होने वाली है। बस फिर क्या था, अपनी दैनिक दिनचर्या छोड़ लोग 'टैंक फुल' कराने की होड़ में लग गए। क्या नौकरीपेशा और क्या व्यापारी, हर कोई कतार में अपनी बारी का इंतजार करता दिखा।
"सिलेंडर के बाद अब पेट्रोल का नंबर": सरकार से खफा दिखे लोग
लाइन में लगे उपभोक्ताओं के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। करीब एक घंटे से अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक स्थानीय निवासी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "समझ नहीं आता कि यह देश किस दिशा में जा रहा है। पहले हम रसोई गैस सिलेंडर के लिए घंटों लाइनों में धक्के खाते रहे और अब अपनी ही गाड़ी में तेल डलवाने के लिए भी यही जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सरकार को इन अफवाहों और सप्लाई चेन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इससे हमारा काम-धंधा और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।"
पंप संचालकों की सफाई: "तेल की कमी नहीं, धैर्य की कमी है"
भीड़ और हंगामे की स्थिति के बीच पेट्रोल पंप संचालक राजेश गुप्ता ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, "पंप पर पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई में कोई बाधा नहीं है। समस्या केवल यह है कि अफवाह के कारण अचानक से ग्राहकों की संख्या सामान्य से चार-पांच गुना बढ़ गई है। हम सभी को पेट्रोल दे रहे हैं, लेकिन इतनी भीड़ को मैनेज करने में समय लग रहा है।" उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन लें।
एक्साइज ड्यूटी में कटौती का नहीं दिख रहा खास असर
हाल ही में सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने के फैसले पर भी भिवानी की जनता बहुत ज्यादा उत्साहित नजर नहीं आई। कतारों में खड़े लोगों का कहना था कि वैश्विक परिस्थितियों और स्थानीय करों के बीच यह कटौती ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। फिलहाल, प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन अफवाहों पर लगाम लगाना और पंपों पर बढ़ रही भीड़ को व्यवस्थित करना है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।