Bhiwani News: भिवानी जिला परिषद में खानक में 11 करोड़ की अवैध वसूली पर पुलिस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास
भिवानी जिला परिषद में खानक में 11 करोड़ की अवैध वसूली पर पुलिस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास
Bhiwani News: जिला परिषद की बहुप्रतीक्षित बैठक में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने, आय के नए स्रोत खोजने और प्रशासनिक पारदर्शिता लाने को लेकर कुल 13 अहम प्रस्तावों पर सर्वसम्मति की मुहर लगी। बैठक में जहां एक तरफ अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल पर नकेल कसने का खाका तैयार किया गया, वहीं खानक खनन क्षेत्र में चल रही करोड़ों रुपये की कथित अवैध वसूली का मुद्दा सबसे ज्यादा गरमाया रहा। जनप्रतिनिधियों ने पुलिस तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सदन में निंदा प्रस्ताव पारित किया।
अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री पर लगेगी पूरी तरह रोक
बैठक के दौरान क्षेत्र में बेतरतीब और बिना अनुमति पनप रही अवैध कॉलोनियों पर गहरी चिंता जताई गई। जिला परिषद चेयरपर्सन अनीता मलिक ने स्पष्ट किया कि अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “सदन ने फैसला किया है कि अवैध कॉलोनियों में किसी भी तरह की जमीनों की रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाने के लिए संबंधित तहसीलदारों को लिखित में कड़े निर्देश दिए जाएंगे।” इसके साथ ही भारत भवन से जुड़े लंबे समय से अटके मामलों को सुलझाने और जिला परिषद को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए आय के स्थायी स्रोत विकसित करने पर सहमति बनी।
खानक में महीने की 11 करोड़ की उगाही! पुलिस पर फूटा पार्षदों का गुस्सा
बैठक में सबसे तीखी बहस खानक खनन क्षेत्र में कथित रूप से जारी ‘काली कमाई’ के खेल को लेकर हुई। पार्षदों ने बेहद संगीन आरोप लगाते हुए दावा किया कि क्षेत्र में हर महीने लगभग 11 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का नेटवर्क चल रहा है। इसके अलावा मालवाहक वाहनों से भी करीब डेढ़ करोड़ रुपये की अलग से उगाही का आरोप लगाया गया।
पार्षदों का कहना था कि अदालत के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद भी स्थानीय पुलिस, संबंधित एसएचओ और डीएसपी स्तर से इस खेल को बंद कराने की कोई मंशा नहीं दिखी। पुलिस की इस कथित शह और निष्क्रियता से नाराज पार्षदों ने एकजुट होकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया।
एफएफसी फंड में देरी से नाराजगी, अब चेयरपर्सन की मंजूरी से ही होंगे भुगतान
वित्तीय मामलों पर चर्चा करते हुए जनप्रतिनिधियों ने एफएफसी (फाइनेंस कमीशन) फंड के समय पर न मिलने का मुद्दा भी उठाया। बैठक में बताया गया कि करीब दो महीने पहले आधिकारिक पत्राचार होने के बावजूद बजट अभी तक परिषद के खाते में स्थानांतरित नहीं हुआ है, जिससे कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
काम में पारदर्शिता और वित्तीय नियंत्रण बनाए रखने के लिए सर्वसम्मति से तय हुआ कि जिला परिषद और डीआरडीए (DRDA) से संबंधित सभी विकास कार्य व भुगतान अब चेयरपर्सन के संज्ञान और अंतिम स्वीकृति के बाद ही अमल में लाए जाएंगे। इसके अलावा लंबे समय से तकनीकी खराबी का शिकार हो रही चेयरपर्सन की गाड़ी की मरम्मत का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
