August 8, 2026

Miri Piri Institute: मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट पर आर-पार के मूड में SGPC और HSGMC, कुरुक्षेत्र में आमने-सामने आए धामी और झींडा

0
Miri Piri Institute: मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट पर आर-पार के मूड में SGPC और HSGMC, कुरुक्षेत्र में आमने-सामने आए धामी और झींडा

मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट पर आर-पार के मूड में SGPC और HSGMC, कुरुक्षेत्र में आमने-सामने आए धामी और झींडा

Miri Piri Institute: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी मेडिकल इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर की मिल्कियत और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ अदालती कमरों तक सीमित नहीं रह गया है। शनिवार को संस्थान परिसर में उस समय स्थिति बेहद रोचक और तनावपूर्ण हो गई, जब पंजाब की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के सर्वोच्च नुमाइंदे भारी समर्थकों के साथ अलग-अलग समय पर यहाँ पहुँचे। एक तरफ SGPC के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंद्र सिंह धामी ने कानूनी स्थिति का हवाला देते हुए संस्थान की कमान अपने पास होने की बात कही, तो दूसरी तरफ HSGMC के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने साफ कर दिया कि संस्थान पर हरियाणा कमेटी का टेकओवर पूरा हो चुका है।

धामी बोले— ‘यह चौधर की लड़ाई नहीं, कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करे हरियाणा कमेटी’

संस्थान में कर्मचारियों और मीडिया से बातचीत करते हुए SGPC अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी ने पूरे घटनाक्रम को ‘अहंकार की लड़ाई’ की जगह ‘जिम्मेदारी के निर्वहन’ का मुद्दा बताया। धामी ने स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल अदालत के विचाराधीन है और हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस पर स्टे दे रखा है। जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक SGPC संस्थान और उसके कर्मचारियों की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने बताया कि इसी जिम्मेदारी के तहत कर्मचारियों के बकाये में से 1.40 करोड़ रुपये की सैलरी जारी कर दी गई है। मेडिकल बोर्ड रद्द किए जाने के HSGMC के दावे को खारिज करते हुए धामी ने कहा कि ट्रस्ट को इस तरह एकतरफा भंग नहीं किया जा सकता और संस्थागत व्यवस्थाएं पूर्ववत लागू हैं।

झींडा का पलटवार— ‘मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हो चुका है टेकओवर, SGPC खुद सौंपे कमान’

धामी के प्रस्थान के कुछ ही देर बाद HSGMC प्रधान जगदीश सिंह झींडा अपने वरिष्ठ सदस्यों के साथ मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट पहुँचे और SGPC के दावों पर कड़ा ऐतराज जताया। झींडा ने तर्क दिया कि HSGMC प्रशासनिक दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की मौजूदगी में पहले ही संस्थान को अपने कब्जे में ले चुकी है। उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट का जो स्टे आया था, वह टेकओवर की प्रक्रिया पर नहीं बल्कि डॉक्टरों के एक बोर्ड को लेकर था, जिसे हरियाणा कमेटी ने खुद ही निरस्त कर दिया है। झींडा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जब हरियाणा की अलग कमेटी को मान्यता मिल चुकी है और यह संस्थान गुरुद्वारा साहिब की जमीन पर स्थित है, तो SGPC को कानूनी मुकदमेबाजी बढ़ाने के बजाय सिखों की बड़ी संस्था होने के नाते खुद ही सारा रिकॉर्ड और प्रबंधन हरियाणा के सुपुर्द कर देना चाहिए।

कर्मचारियों के वेतन और वित्तीय बजट पर भी छिड़ी जंग

दोनों पक्षों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में संस्थान के कर्मचारियों का वेतन भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। HSGMC के वरिष्ठ मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामसर ने बताया कि उन्होंने संस्थान के सीईओ से स्टाफ के पे-बिल तैयार करने को कहा था, लेकिन स्टे का हवाला देकर उन्होंने बिल नहीं बनाया, जिसकी जांच कराई जाएगी। वहीं जगदीश सिंह झींडा ने आरोप लगाया कि SGPC के शासन में स्टाफ को वेतन के लिए अक्सर धरने देने पड़ते थे, जबकि HSGMC पंजाब कमेटी से बेहतर वेतन देकर इस मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सेंटर को संचालित करने में सक्षम है। झींडा के अनुसार, HSGMC के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक का फंड उपलब्ध है।

कानूनी पेच में उलझा मेडिकल कॉलेज का भविष्य

दोनों कमेटियों की इस खींचतान ने मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट के भविष्य और वहाँ कार्यरत स्टाफ के मन में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। एक ओर जहाँ SGPC स्टे ऑर्डर के सहारे अपना प्रशासनिक दखल कायम रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर HSGMC प्रादेशिक अधिकार और टेकओवर की कार्रवाई को अंतिम मानकर काम कर रही है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासनिक रुख पर टिकी हैं कि इस ऐतिहासिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थान का नियंत्रण वास्तव में किसके हाथ में रहता है।

यह भी पढ़ें– बंतो कटारिया हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग की चेयरपर्सन बनीं, रेनू डाबला को वाइस चेयरपर्सन की जिम्मेदारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed