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Madhuri Dixit: "लोग कहते थे इसको कुछ खिलाओ, बहुत दुबली है", माधुरी दीक्षित ने बयां किया बॉडी शेमिंग का दर्द

Jun 16, 2026 4:19 PM

पर्दे पर अपनी कातिल मुस्कान और बेहतरीन अभिनय से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली माधुरी दीक्षित आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। इन दिनों वे अपनी नई फिल्म 'मां बहन' में अपनी शानदार परफॉर्मेंस के लिए चौतरफा तारीफें बटोर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में उनका किरदार समाज की दकियानूसी सोच और जजमेंटल रवैये से लोहा लेता दिखता है, खासकर उनके स्लीवलेस ब्लाउज पहनने को लेकर। रील लाइफ के इसी दर्द को अपनी रीयल लाइफ से जोड़ते हुए माधुरी ने एक हालिया इंटरव्यू में अपनी जिंदगी का वह पन्ना खोला है, जिससे अमूमन हर दौर की अभिनेत्रियां गुजरती रही हैं— यानी 'बॉडी शेमिंग'।

"वजन बढ़े तो दिक्कत, घटे तो आफत"

माधुरी दीक्षित ने बेबाकी से स्वीकार किया कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते आप लोगों की नजरों से और उनकी बेजा टिप्पणियों से खुद को पूरी तरह बचा नहीं सकते। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, "जब मैंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब लोग मुझे देखकर अजीब-अजीब कमेंट्स करते थे। उनका कहना था कि मैं बहुत ज्यादा दुबली-पतली हूं। कई लोग तो पीठ पीछे या सामने ही कह देते थे कि 'इसको कुछ खिलाओ-पिलाओ।' समाज की यह बड़ी विडंबना है कि लोग आपको बहुत जल्दी जज कर लेते हैं। अगर आपका वजन थोड़ा बढ़ जाए तो उन्हें दिक्कत होती है, और अगर कम हो जाए तो वे आफत मचा देते हैं।"

सोशल मीडिया की 'गुमनाम' फौज पर साधा निशाना

आज के दौर और अपने जमाने की तुलना करते हुए माधुरी ने एक बेहद जरूरी मुद्दा उठाया। उनका मानना है कि 80 और 90 के दशक में इन आलोचनाओं से निपटना फिर भी थोड़ा आसान था क्योंकि तब आज की तरह सोशल मीडिया का जाल नहीं था। उन्होंने कहा, "आज के समय में चीजें बहुत ज्यादा बदल चुकी हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपनी पहचान छिपाकर (अनाम रहकर) किसी के भी लुक्स या निजी जिंदगी पर बेहद भद्दे कमेंट्स कर देते हैं। ट्रोलिंग का यह दौर काफी मानसिक तनाव देने वाला है।" इस दलदल से निकलने का मंत्र देते हुए माधुरी ने कहा कि सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि आप केवल अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें, वही करें जो आपका दिल कहे और सबसे पहले खुद से प्यार करना सीखें।

'अबोध' की नाकामी से 'तेजाब' के स्टारडम तक का सफर

माधुरी दीक्षित का यह बयान इस बात की याद दिलाता है कि सफलता की इस ऊंचाई तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितना लंबा रास्ता तय किया है। 1984 में राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘अबोध’ से बतौर मुख्य अभिनेत्री अपने सफर की शुरुआत करने वाली माधुरी के लिए शुरुआती चार साल बेहद उतार-चढ़ाव भरे रहे। उनकी शुरुआती कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरीं और आलोचकों ने उन्हें सिरे से खारिज करना शुरू कर दिया था।

लेकिन, साल 1988 में आई निर्देशक एन. चंद्रा की फिल्म ‘तेजाब’ ने उनकी तकदीर को पूरी तरह बदल कर रख दिया। अनिल कपूर के साथ आई इस फिल्म के एक गाने ‘एक दो तीन’ ने देश में ऐसा तहलका मचाया कि माधुरी रातों-रात सुपरस्टार बन गईं। उनके डांस स्टेप्स और एक्सप्रेशंस ने उन्हें 'नेशनल क्रश' बना दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और ‘राम लखन’, ‘दिल’, ‘बेटा’ और ‘साजन’ जैसी एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर खुद को बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया, जिसकी चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी है।

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