Chandigarh: नगर निगम कमिश्नर ने 227.70 करोड़ की पाइपलाइन परियोजना की फैक्ट-फाइंडिंग जांच के दिए आदेश
पानी की पाइपलाइन बदलने की महत्वाकांक्षी परियोजना
Chandigarh: नगर निगम की जनरल हाउस बैठक में मंजूर हुई 227.70 करोड़ रुपये की पानी की पाइपलाइन बदलने की महत्वाकांक्षी परियोजना अब जांच के घेरे में आ गई है। परियोजना को लेकर उठे विवाद और प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने के बाद नगर निगम आयुक्त अमित कुमार ने पूरे मामले की फैक्ट-फाइंडिंग जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पेशल कमिश्नर हरप्रीत सिंह सूदन को सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक रिपोर्ट जल्द सौंपने के निर्देश दिए हैं। स्पेशल कमिशनर की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी कमी या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो उसके अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।
यह परियोजना कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक बिछी 1200 एमएम व्यास की पुरानी पीएससी पाइपलाइन को बदलने से संबंधित है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब 227.70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हाल ही में यह प्रस्ताव नगर निगम की जनरल हाउस बैठक में पारित हो गया था, लेकिन इसके बाद एजेंडा पेश करने की प्रक्रिया को लेकर विवाद शुरू हो गया। नगर निगम आयुक्त के अनुसार, एजेंडा मंजूर होने के बाद मेयर, विभिन्न राजनीतिक दलों और बड़ी संख्या में पार्षदों की ओर से शिकायतें और प्रतिनिधित्व प्राप्त हुए। इनमें वे पार्षद भी शामिल हैं जो बैठक के दौरान मौजूद थे और वे भी, जो एजेंडा पारित होने के समय सदन में उपस्थित नहीं थे। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव पर पर्याप्त चर्चा और पूरी जानकारी के बिना निर्णय लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त अमित कुमार ने पार्षदों से भी बातचीत की।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना को अगली जनरल हाउस बैठक में दोबारा चर्चा और अनुमोदन के लिए रखने से निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सहभागी होगी। इसी उद्देश्य से स्पेशल कमिश्नर को पूरे मामले के सभी पहलुओं की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस जांच का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना, निर्धारित प्रक्रिया के पालन की समीक्षा करना और पूरे मामले के तथ्यों को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में सभी जरूरी जानकारियां निर्वाचित प्रतिनिधियों के समक्ष पूरी तरह रखी जानी चाहिए, ताकि वे पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें। गौरतलब है कि इस परियोजना को लेकर पिछले कुछ दिनों से नगर निगम की राजनीति गरमाई हुई है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि 227.70 करोड़ रुपये का एजेंडा पर्याप्त चर्चा के बिना जल्दबाजी में पारित कराया गया। ऐसे में निगम आयुक्त द्वारा फैक्ट-फाइंडिंग जांच के आदेश को पूरे विवाद में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
