Chandigarh News: चंडीगढ़ में पीजीआई-पीयू के बीच बनेगा 8.4 करोड़ का अंडरपास, 6 महीने में होगा तैयार
Jun 19, 2026 4:25 PM
चंडीगढ़: चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच सड़क पार करने वाले हजारों मरीजों, तीमारदारों, डॉक्टरों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने लंबे समय से प्रस्तावित पैदल अंडरपास परियोजना के लिए दोबारा टेंडर जारी कर दिया है। करीब 8.4 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस अंडरपास को छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद इस व्यस्त मार्ग पर सुरक्षित और सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी तथा सड़क पार करने के दौरान होने वाले हादसों की आशंका भी कम होगी।
चंडीगढ़ के इस हिस्से में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी के बीच आवागमन करते हैं। मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों और विद्यार्थियों को व्यस्त सड़क पार करने में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए प्रशासन ने पैदल अंडरपास परियोजना को प्राथमिकता दी है। अधिकारियों का मानना है कि अंडरपास बनने के बाद लोगों को सड़क पार करने के लिए ट्रैफिक के बीच जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आवागमन अधिक सुरक्षित हो जाएगा।
दूसरी बार जारी हुआ टेंडर
यह दूसरी बार है जब यूटी प्रशासन ने इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। प्रशासन का उद्देश्य परियोजना को जल्द धरातल पर उतारना और तय समयसीमा के भीतर पूरा करना है। इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार परियोजना के लिए आवश्यक तकनीकी और संरचनात्मक बदलावों के बाद संशोधित योजना तैयार की गई है। अब निर्माण प्रक्रिया को गति देने के लिए दोबारा निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।
प्रस्तावित अंडरपास का आकार चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित रोज गार्डन अंडरपास से भी बड़ा होगा। परियोजना के तहत इसे करीब 14 मीटर चौड़ा और 32 मीटर लंबा बनाया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि अधिक चौड़ाई और बेहतर डिजाइन के कारण एक समय में बड़ी संख्या में लोग आसानी से आवाजाही कर सकेंगे। इससे भीड़भाड़ की समस्या कम होगी और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
लिफ्ट और रैंप की सुविधा, 12 कमर्शियल बूथ
संशोधित डिजाइन में एस्केलेटर लगाने का प्रस्ताव हटा दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध स्थान को देखते हुए एस्केलेटर व्यावहारिक विकल्प नहीं माना गया। इसके स्थान पर बुजुर्गों, मरीजों और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए लिफ्ट और रैंप बनाए जाएंगे। इससे व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को अंडरपास का उपयोग करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
परियोजना के संशोधित स्वरूप में अंडरपास के भीतर 12 कमर्शियल बूथ बनाने का प्रावधान रखा गया है। पहले इनकी संख्या 20 प्रस्तावित थी, लेकिन नई योजना में इसे घटाया गया है। इन बूथों में फोटोस्टेट सहित अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इससे पीजीआई आने वाले मरीजों और पंजाब यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों को सुविधा मिलेगी, जबकि प्रशासन को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
आधुनिक सुविधाओं और बेहतर सुरक्षा पर रहेगा फोकस
अंडरपास को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देने के लिए इसमें ग्रेनाइट फ्लोरिंग की जाएगी। इसके अलावा पूरे मार्ग को एलईडी लाइटिंग से रोशन किया जाएगा ताकि दिन और रात दोनों समय सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके। प्रशासन का कहना है कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य सुविधा, सुरक्षा और सुगमता को बढ़ाना है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह अंडरपास चंडीगढ़ के महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में शामिल होगा।