Chandigarh News: चंडीगढ़ में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं बदले हालात, बाजारों में अब भी दिख रहे अवैध वेंडर
Jun 11, 2026 10:06 AMचंडीगढ़: चंडीगढ़ में अवैध वेंडरों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और प्रशासनिक अधिकारियों को अदालत में तलब किए जाने के करीब एक माह बाद भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों, विशेष रूप से सेक्टर-22 स्थित शास्त्री मार्केट में बड़ी संख्या में वेंडर अब भी कारोबार करते दिखाई दे रहे हैं। इससे दुकानदारों और ग्राहकों को आवागमन तथा खरीदारी के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम की ओर से दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्या का स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा। बाजारों में लगातार बढ़ रही भीड़ और अव्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं।
शास्त्री मार्केट के व्यापारियों ने उठाए सवाल
शास्त्री मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन और स्मॉल ट्रेडर्स एसोसिएशन चंडीगढ़ के अध्यक्ष मुकेश गोयल ने दावा किया कि बाजार में रोजाना हजारों ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद अवैध वेंडरों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है, जिससे दुकानदारों के साथ-साथ आम लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी क्षेत्र में नियमित निगरानी और स्थायी तैनाती की बात करते हैं, लेकिन बाजार की स्थिति इन दावों से मेल नहीं खाती। उनके अनुसार यदि निगरानी व्यवस्था प्रभावी है तो फिर अवैध वेंडिंग लगातार कैसे जारी है, यह एक बड़ा सवाल है।
व्यापारी संगठनों का आरोप है कि अवैध वेंडरों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई अधिकतर अस्थायी साबित होती है। उनका कहना है कि जब निगम की टीम मौके पर पहुंचती है तो वेंडर कुछ समय के लिए वहां से हट जाते हैं, लेकिन कार्रवाई खत्म होते ही दोबारा उसी स्थान पर बैठ जाते हैं। मुकेश गोयल ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे अधिकारियों को वास्तविक स्थिति के वीडियो और प्रत्यक्ष दृश्य दिखा सकते हैं। उनका आरोप है कि केवल चालान काटने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक और प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी नाराजगी
अवैध वेंडिंग के मामले में पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम के रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ के होम सेक्रेटरी, डिप्टी कमिश्नर और मेयर को अदालत में उपस्थित होना पड़ा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया था कि शहर में अवैध कब्जों और अनियंत्रित वेंडिंग को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए थे और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता बताई थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चंडीगढ़ को "सिटी ब्यूटीफुल" के रूप में जाना जाता है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते अवैध कब्जे और अनियंत्रित वेंडिंग इस पहचान को प्रभावित कर रहे हैं। अदालत ने प्रशासन को शहर की मूल संरचना और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी याद दिलाई थी। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि यदि किसी अधिकारी के घर के सामने इस प्रकार का अतिक्रमण हो जाए तो क्या उसे भी इसी तरह नजरअंदाज किया जाएगा। इस टिप्पणी को अदालत की गंभीर चिंता के रूप में देखा गया था।
वेंडिंग अपीलों के निपटारे पर भी उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वेंडिंग से जुड़े मामलों और अपीलों के लंबित रहने पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि संबंधित मामलों का समय पर निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा और प्रक्रिया में देरी किस कारण हो रही है। कोर्ट ने कहा था कि जब अन्य न्यायिक और प्रशासनिक संस्थाएं तय समय सीमा के भीतर मामलों का निपटारा कर सकती हैं, तो नगर निगम स्तर पर लंबित मामलों को लेकर देरी उचित नहीं मानी जा सकती।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि केवल चालान जारी करना या समय-समय पर हटाने की कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिससे अवैध वेंडिंग पर प्रभावी और स्थायी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित वेंडिंग जोन के बेहतर उपयोग और नियमन पर भी जोर दिया था। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे बाजारों में अव्यवस्था और असंतोष का माहौल बना हुआ है।