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चंडीगढ़ में सड़क पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: कार से हुई टक्कर तो गुस्से में युवक ने फूंक डाली अपनी ही बाइक

May 25, 2026 12:44 PM

चंडीगढ़। चंडीगढ़ की खूबसूरत और शांत सड़कों पर रविवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने राहगीरों को हैरत में डाल दिया। सेक्टर-37 और सेक्टर-41 की डिवाइडिंग रोड पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब बीच सड़क पर एक मोटरसाइकिल आग के गोले में तब्दील हो गई। दरअसल, यह कोई तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट से लगी आग नहीं थी, बल्कि एक युवक के बेकाबू गुस्से का नतीजा थी। पुलिस के मुताबिक, बाइक सवार ने आगे चल रही एक कार को पीछे से टक्कर मार दी थी, जिसके बाद हुए झगड़े ने इस कदर तूल पकड़ा कि युवक ने सरेराह अपनी ही गाड़ी को राख कर दिया।

'पेट्रोल टंकी खोली और मार दी माचिस', मंजर देख सहम गया कार चालक

सेक्टर-39 थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी की पहचान जसविंदर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पंजाब के रोपड़ का रहने वाला है और चंडीगढ़ में मिस्त्री का काम करता है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद जब कार चालक नीचे उतरा, तो दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी। इसी तूतू-मैमै के बीच जसविंदर अचानक तैश में आ गया। उसने आव देखा न ताव, अपनी बाइक की पेट्रोल टंकी का ढक्कन खोला और जेब से माचिस निकालकर आग लगा दी।

लपटें इतनी ऊंची थीं कि कार ड्राइवर बुरी तरह डर गया। आसपास के लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को फोन घुमाया। दमकल की गाड़ी जब तक पहुंचती, बाइक का ढांचा ही बचा था। दिलचस्प बात यह रही कि कार चालक इस ड्रामे से इतना घबरा गया कि उसने पुलिस को शिकायत देने से मना कर दिया और कहा कि वह अपनी गाड़ी का नुकसान खुद भुगत लेगा, लेकिन इस सनकी युवक के विवाद में नहीं पड़ेगा।

मेडिकल में खुला 'नशे का राज', पुलिस ने इन धाराओं में कसा शिकंजा

पुलिस ने जब जसविंदर को हिरासत में लेकर उसका मेडिकल कराया, तो पूरी कहानी साफ हो गई। वह शराब के नशे में पूरी तरह धुत था, जिसके कारण वह अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाया। इस हरकत की वजह से व्यस्त सड़क पर कुछ देर के लिए जाम की स्थिति भी बन गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत कार्रवाई की है।

कानूनी पहलू: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कलंदरा (निवारक केस) दर्ज किया है। पुराने कानून (CrPC) की तर्ज पर बनी ये धाराएं सार्वजनिक शांति भंग करने की आशंका और संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार देती हैं। इसी कानून के तहत आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा रहा है, जहां उसे शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने का आदेश दिया जा सकता है।

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