Chandigarh News: सेक्टर-11 फायरिंग केस में रंगदारी, सुपारी और गैंगस्टर कनेक्शन के तार जोड़ने में जुटी जांच एजेंसियां
Jun 20, 2026 10:48 AM
चंडीगढ़: सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकल हॉल के कैशियर जानकी दास हत्याकांड में अब जांच एजेंसियों का फोकस रंगदारी और गैंगस्टर नेटवर्क के एंगल पर केंद्रित हो गया है। मामले में तीनों मुख्य आरोपियों के पुलिस गिरफ्त में आने के बाद चंडीगढ़ पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं कि हत्या के पीछे रंगदारी, कारोबारी रंजिश, गैंगस्टर गिरोह या कोई अन्य कारण था।
मामले में बुधवार को जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किए गए दो शूटर सन्नी मेहरा और आर्यन शर्मा को चंडीगढ़ लाया जा रहा था। वीरवार तड़के चंडीगढ़ पहुंचने पर पुलिस वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसी दौरान दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर मौके का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की। पुलिस टीम ने पीछा कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके दौरान हुई मुठभेड़ में दोनों घायल हो गए। बाद में पुलिस ने उन्हें दोबारा काबू कर लिया। प्रारंभिक उपचार के बाद दोनों को पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां से शुक्रवार को मेडिकल जांच पूरी होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर पुलिस अपने साथ ले गई।
उधर, वीरवार शाम सांबा पुलिस ने मामले के तीसरे मुख्य आरोपी अमित कुमार उर्फ शराबी को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब उसे प्रोडक्शन वारंट पर चंडीगढ़ लाने की तैयारी की जा रही है। उसके चंडीगढ़ पहुंचने के बाद तीनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी ताकि हत्याकांड की पूरी साजिश, फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े तारों का खुलासा किया जा सके। जांच एजेंसियां रंगदारी के अलावा गलत पहचान, कारोबारी दुश्मनी, सुपारी किलिंग और अंतरराज्यीय गैंग कनेक्शन जैसे अन्य पहलुओं की भी समानांतर जांच कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार वारदात के बाद भी शहर के कई कारोबारियों को रंगदारी से जुड़े धमकी भरे कॉल और संदेश मिलने की सूचनाएं पुलिस तक पहुंची थीं। इसी कारण जांच में रंगदारी का पहलू बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में आईजीपी ने भी रंगदारी के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और धमकी देने वालों से लेकर पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर कानून के दायरे में लाया जाएगा।
पीजीआई से मिली छुट्टी, कमांडो घेरे में ले गई पुलिस
गिरफ्तार शूटर सन्नी मेहरा और आर्यन शर्मा को शुक्रवार को पीजीआई से डिस्चार्ज कर दिया गया। दोनों आरोपियों को वीरवार तड़के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद पहले सेक्टर-16 के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में बेहतर इलाज और निगरानी के लिए उन्हें पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट किया गया। शूटरों को ट्रॉमा सेंटर की डिजास्टर मैनेजमेंट यूनिट में रखा गया था, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे डिस्चार्ज प्रक्रिया शुरू हुई। अस्पताल प्रशासन ने पहले दोनों का एक्सरे और अन्य जरूरी मेडिकल परीक्षण कराए। सभी रिपोर्ट सामान्य आने के बाद पुलिस को उन्हें साथ ले जाने की अनुमति दी गई। इस दौरान पीजीआई परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और बड़ी संख्या में कमांडो तैनात किए गए।
गलत पहचान या तय टारगेट? जांच का सबसे अहम सवाल
जानकी दास हत्याकांड की जांच में अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण बन गया है कि क्या शूटरों ने सही व्यक्ति को निशाना बनाया था या फिर गलत पहचान के कारण हत्या हुई। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपियों को चश्मा लगाने वाले एक भारी-भरकम व्यक्ति की पहचान बताई गई थी। वे सेक्टर-11 की कई मेडिकल दुकानों पर घूमते रहे और बताए गए हुलिए से मेल खाने वाले व्यक्ति की तलाश करते रहे। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और स्थानीय नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि असली टारगेट कौन था और जानकी दास कहीं गलत पहचान का शिकार तो नहीं हुए।
तुर्किये की जिगाना पिस्टल से बरसाईं थी गोलियां
सेक्टर-11 में हुई इस सनसनीखेज हत्या में इस्तेमाल हथियार ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। पुलिस के अनुसार शूटरों ने तुर्किये निर्मित जिगाना पिस्टल का इस्तेमाल कर कुछ ही सेकेंड में कई राउंड फायर किए। जिगाना पिस्टल को हाल के वर्षों में कई गैंगस्टर और संगठित अपराध मामलों में बरामद किया जा चुका है। फोरेंसिक टीम हथियार की बैलिस्टिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इसका इस्तेमाल पहले किसी अन्य वारदात में तो नहीं हुआ। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि यह विदेशी हथियार जम्मू-कश्मीर और पंजाब के अपराधी नेटवर्क तक कैसे पहुंचा।
जेल में बैठा माखन चला रहा था गैंग का नेटवर्क
जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंद गैंगस्टर रोहित कुमार उर्फ माखन का नाम एक बार फिर संगठित अपराध के बड़े नेटवर्क से जुड़कर सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार माखन जेल में रहते हुए भी अपने गुर्गों को निर्देश दे रहा था और रंगदारी व आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहा था। पहले भी हेरोइन और हथियार तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क में उसकी भूमिका उजागर हो चुकी है। जांच एजेंसियों को उसके जेल सेल से मोबाइल फोन मिलने के बाद यह आशंका और मजबूत हुई कि वह जेल से ही गैंग ऑपरेट कर रहा था। अब पुलिस उसके पूरे नेटवर्क की वित्तीय और आपराधिक गतिविधियों की पड़ताल कर रही है।