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Sleeplessness and Infertility: आज की कम नींद कल बन सकती है बांझपन का कारण, फर्टिलिटी एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

May 27, 2026 5:12 PM

चंडीगढ़, Sleeplessness and Infertility : आधुनिक जीवनशैली में देर रात तक जागना और सुबह जल्दी उठना एक आम रूटीन बन चुका है। ट्रिसिटी (चंडीगढ़, पंचकुला और मोहाली) समेत पूरे देश में युवाओं के बीच कम सोने की यह आदत अब एक गंभीर मेडिकल समस्या का रूप ले रही है। चंडीगढ़ स्थित बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. राखी गोयल ने इस विषय पर बेहद चौंकाने वाले तथ्य साझा किए हैं। डॉ. राखी गोयल के अनुसार, रोज सिर्फ 5 घंटे सोना कई लोगों को सामान्य लग सकता है क्योंकि हमारा शरीर धीरे-धीरे इस थकावट की आदत डाल लेता है। लेकिन फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता के मामले में इसका बेहद घातक असर पड़ता है, जो शुरुआत में दिखाई नहीं देता। जो नींद लोग आज करियर या मनोरंजन के चक्कर में टाल रहे हैं, वही भविष्य में माता-पिता बनने के सपने में बड़ी देरी का कारण बन रही है।

फर्टिलिटी हार्मोन का सीधा कनेक्शन है आपकी गहरी नींद से

रात का समय केवल शारीरिक थकान मिटाने के लिए नहीं होता, बल्कि इसी दौरान हमारा शरीर अंदरूनी अंगों की मरम्मत और हार्मोन का संतुलन ठीक करता है। महिलाओं में अंडोत्सर्जन (अंडा बनने और निकलने की प्राकृतिक प्रक्रिया) और भ्रूण का गर्भाशय में ठहरना पूरी तरह से फर्टिलिटी हार्मोन पर निर्भर करता है। जब कोई महिला लगातार कम या अनियमित नींद लेती है, तो ये जरूरी हार्मोन एक तय तरीके से काम करना बंद कर देते हैं। प्रोजेस्टेरोन जैसे आवश्यक हार्मोन का स्तर गिरने लगता है, जिससे ओव्यूलेशन समय पर नहीं हो पाता। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये आंतरिक बदलाव अचानक सामने नहीं आते और शुरुआती मेडिकल जांच में भी तुरंत पकड़ में नहीं आते।

पुरुषों के लिए भी बेहद खतरनाक है नींद की यह कमी

अक्सर फर्टिलिटी और गर्भधारण की चर्चाओं में पुरुषों की जीवनशैली को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि डॉ. राखी गोयल ने स्पष्ट किया है कि पुरुषों की नींद का उनकी फर्टिलिटी पर सीधा असर पड़ता है। हालिया रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि जो पुरुष रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें पार्टनर को कंसीव कराने की संभावना 7 से 8 घंटे सोने वाले पुरुषों के मुकाबले काफी कम हो जाती है। पुरुषों के शरीर में मुख्य प्रजनन हार्मोन यानी टेस्टोस्टेरोन का निर्माण मुख्य रूप से गहरी नींद के दौरान ही होता है। लगातार नींद में कटौती करने से न केवल इस हार्मोन का स्तर गिरता है, बल्कि शुक्राणुओं (Sperm) की संख्या और उनकी गुणवत्ता भी बुरी तरह प्रभावित होती है।

कॉॉर्टिसोल का चक्र: बिना किसी अतिरिक्त खर्च के ऐसे सुधारें फर्टिलिटी

जब शरीर को पर्याप्त आराम और गहरी नींद नहीं मिलती, तो मस्तिष्क इसे एक आपातकालीन स्थिति मानता है और कॉर्टिसोल यानी तनाव हार्मोन का स्राव बढ़ा देता है। लंबे समय तक शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहने से पुरुष और महिला दोनों के ही फर्टिलिटी हार्मोन्स ब्लॉक होने लगते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति खुद को ऊपरी तौर पर बिल्कुल सामान्य और फिट महसूस कर सकता है, जिससे यह बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती जाती है। अच्छी बात यह है कि इस गंभीर समस्या को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सिर्फ अपनी आदतें बदलकर ठीक किया जा सकता है। डॉ. राखी गोयल के मुताबिक, इसके लिए वीकेंड पर एक्स्ट्रा सोने के बजाय रोज रात को एक तय समय पर बिस्तर पर जाने की आदत डालनी होगी, ताकि शरीर की प्राकृतिक लय दोबारा बहाल हो सके।

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