Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह साल का वह खास समय है जब आस्था, उम्मीद और आत्मविश्वास एक साथ जुड़ जाते हैं। शिवभक्तों के लिए यह रात जितनी आध्यात्मिक होती है, उतनी ही व्यावहारिक भी मानी जाती है। आम जीवन में धन की तंगी, विवाह में देरी या करियर में रुकावट जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोग इस दिन छोटे-छोटे उपाय करके बड़ी राहत की उम्मीद रखते हैं। ज्योतिष और शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पर किए गए उपाय जल्दी असर दिखाते हैं। विशेष रूप से शमी की पत्तियों का महत्व इस दिन और बढ़ जाता है। यही वजह है कि पीढ़ियों से लोग इस दिन शमी से जुड़े उपायों को अपनाते आ रहे हैं।



इस वर्ष महाशिवरात्रि की तिथि और समय

फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। तिथि 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी की शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा और रुद्राभिषेक का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। रविवार के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में होने वाली यह पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। महाशिवरात्रि के दिन की गई पूजा से भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।



सर्वार्थ सिद्धि योग: सभी इच्छाओं की पूर्ति

15 फरवरी को सुबह 7:08 बजे से शाम 7:48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। यह योग जीवन में सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाला योग माना जाता है। इस दिन किए गए कार्य, चाहे वह व्यापार, वाहन खरीदना, या कोई महत्वपूर्ण निर्णय हो, सफल होते हैं। यह योग बाधाओं को दूर करता है और मनोवांछित फल प्रदान करता है।



रुद्राभिषेक: शिवलिंग का पवित्र स्नान

रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान शिव का पवित्र वस्तुओं से स्नान कराना। इसमें जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल आदि का उपयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इससे मन शांत रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। कहा जाता है कि इस दिन किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और वे भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।



नक्षत्र और ग्रहों का विशेष संयोग

महाशिवरात्रि के दिन उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग रहेगा। पूरे दिन व्यतीपात योग रहेगा, जो चुनौतीपूर्ण ग्रह प्रभाव को दर्शाता है। इसके अलावा कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का संयोग चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेगा।



रुद्राभिषेक से आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ

शास्त्रों में कहा गया है कि “रुतम् दुखम् द्रावयति इति रुद्र:” अर्थात भगवान शिव सभी दुखों को नष्ट करने वाले हैं। रुद्राभिषेक और रुद्रार्चन करने से हमारे पिछले कर्मों से जुड़े पाप और बाधाएँ नष्ट होती हैं। यह पूजा साधक में शिव तत्व का विकास करती है। रुद्रहृदयोपनिषद के अनुसार, भगवान रुद्र सभी देवताओं की आत्मा हैं और सभी देवताओं में शिव का स्वरूप विद्यमान है। इस दिन की गई पूजा से कालसर्प दोष, गृहक्लेश, व्यापार में नुकसान और शिक्षा में बाधा जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।



लव लाइफ और व्यक्तिगत समस्याओं में भी राहत

ज्योतिषियों का मानना है कि महाशिवरात्रि पर विधि-विधान के साथ शिव जी की पूजा करने से लव लाइफ से जुड़ी दिक्कतें भी समाप्त हो सकती हैं। इस दिन किए गए उपायों का असर जल्द दिखाई देता है। विशेष रूप से युवाओं और विवाह योग्य लोगों के लिए यह पूजा लाभकारी मानी जाती है। शमी की पत्तियों और रुद्राभिषेक के संयोजन से जीवन में प्रेम और संबंधों में सामंजस्य बना रहता है।



पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा और मान्यताएँ

महाशिवरात्रि के दिन शमी से जुड़े उपाय और रुद्राभिषेक की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। भक्त मानते हैं कि इस दिन की गई पूजा से न केवल जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, बल्कि व्यक्ति का मानसिक और आध्यात्मिक विकास भी होता है। लोग इस दिन सुबह से ही व्रत रखते हैं और रात्रि में भगवान शिव की पूजा-अर्चना में समय बिताते हैं। इससे न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति आती है, बल्कि पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।



घर पर शिवलिंग स्थापना और पूजा का महत्व

यदि कोई व्यक्ति मंदिर नहीं जा सकता, तो घर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा करना अत्यंत फलदायक माना जाता है। घर के लिए छोटा शिवलिंग उचित रहता है, जिसका आकार हाथ के अंगूठे के पहले भाग से बड़ा न हो। शिवलिंग के साथ गणेश जी, पार्वती माता, कार्तिकेय और नंदी की छोटी प्रतिमाएं भी रखी जा सकती हैं। 

  • शुभ धातुएँ: सोना, चांदी, पीतल, मिट्टी, पत्थर, स्फटिक और पारद
  • अशुभ धातुएँ: एल्युमीनियम, स्टील और लोहे के शिवलिंग



पूजा में करें महामृत्युंजय मंत्र का जप

महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा के समय महामृत्युंजय मंत्र का जप अत्यंत फलदायक माना जाता है। यह मंत्र अनजाने भय और चिंता को दूर करता है और शिव की विशेष कृपा प्रदान करता है।

महामृत्युंजय मंत्र: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

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