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E-Rickshaw Fraud Case: घटिया ई-रिक्शा और एजेंसी के धोखे से तंग आकर युवक ने लगाई आग, आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास

E-Rickshaw Fraud Case: घटिया ई-रिक्शा और एजेंसी के धोखे से तंग आकर युवक ने लगाई आग, आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास

घटिया ई-रिक्शा और एजेंसी के धोखे से तंग आकर युवक ने लगाई आग, आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास

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AAmandeep Singh

E-Rickshaw Fraud Case: रोजी-रोटी कमाने का सपना लेकर ई-रिक्शा खरीदने वाले एक गरीब परिवार पर एजेंसी संचालक की धोखाधड़ी इस कदर भारी पड़ी कि एक युवक अपनी जीवनलीला समाप्त करने की दहलीज पर पहुंच गया। रविवार को शहर की अग्रवाल कॉलोनी उस वक्त दहल गई जब मंजीत नामक पीड़ित युवक ने गुस्से और लाचारी में अपने ई-रिक्शे पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। देखते ही देखते ई-रिक्शा धू-धू कर जल उठा।

रिक्शे को आग के हवाले करने के बाद मंजीत ने खुद भी कोई आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की। हालांकि, मौके पर मौजूद परिजनों और स्थानीय राहगीरों ने फुर्ती दिखाते हुए उसे सही समय पर काबू में कर लिया और एक बड़ा हादसा होने से टल गया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और भारी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

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8.5 लाख का निवेश और न पक्का बिल मिला, न ही वारंटी

आपबीती सुनाते हुए मंजीत की आंखें भर आईं। उसने बताया कि परिवार का पालन-पोषण करने और अपने पांव पर कुल्हाड़ी न मारकर सम्मान से आजीविका कमाने के लिए उसने अपने भाइयों और दोस्तों के साथ मिलकर 6 से 7 ई-रिक्शा खरीदे थे। इसके लिए उन्होंने अपनी हैसियत से बाहर जाकर सगे-संबंधियों व अन्य स्रोतों से भारी-भरकम कर्ज उठाया और लगभग 8 से 8.5 लाख रुपये का निवेश किया।

मंजीत का गंभीर आरोप है कि जब उन्होंने एजेंसी से गाड़ियां खरीदीं, तो संचालक ने उन्हें झांसे में रखा। न तो कोई पक्का खरीद बिल दिया गया और न ही वारंटी कार्ड मुहैया कराया गया। हर बार केवल जुबानी आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया गया।

दो महीने में ही दगा दे गईं बैटरियां, एजेंसी ने मोड़ा मुंह

खरीदारी के महज दो से तीन महीनों के भीतर ही मंजीत और उसके साथियों की खुशियां काफूर हो गईं। एक-एक करके सभी ई-रिक्शों की बैटरियां बैठ गईं और गाड़ियों में गंभीर तकनीकी कमियां आने लगीं। स्थिति यह हो गई कि ई-रिक्शे चलने लायक ही नहीं रहे।

जब भी मंजीत शिकायत लेकर एजेंसी संचालक के पास पहुंचता, तो उसे हर बार टालमटोल कर बैरंग लौटा दिया जाता। गाड़ियां बंद होने से रोजाना की कमाई ठप पड़ गई, जबकि दूसरी ओर सिर पर कर्ज का भारी बोझ बढ़ता जा रहा था। मानसिक प्रताड़ना और कर्जदारों के दबाव से टूट चुके मंजीत ने आखिर तंग आकर यह आत्मघाती कदम उठा डाला। फिलहाल पीड़ित ने पुलिस और प्रशासन से धोखेबाज एजेंसी संचालक पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और अपना फंसा हुआ पैसा वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

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