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फरीदाबाद से जम्मू घूमने गए 5 दोस्तों के साथ बड़ा हादसा, नगरोटा के पास कार-बस की टक्कर में 3 की मौत

Jun 15, 2026 11:56 AM

फरीदाबाद। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अंतर्गत बल्लभगढ़ की भूदत्त कॉलोनी से जम्मू-कश्मीर की ट्रिप पर निकले पांच दोस्तों के साथ रविवार तड़के एक बड़ा वज्रपात हो गया। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगरोटा के पास इनकी कार सामने से आ रही एक तेज रफ्तार बस की चपेट में आ गई। टक्कर इतनी भयावह थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। इस दिल दहला देने वाले हादसे में दो युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि तीसरे युवक की जान अस्पताल में इलाज के दौरान गई। वहीं, कार में सवार दो अन्य दोस्त जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

सुनील वर्मा के इकलौते बेटे थे मोहित, बुझ गया घर का इकलौता चिराग

इस हादसे ने भूदत्त कॉलोनी के कई हंसते-खेलते परिवारों को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है। मृतकों में शामिल मोहित वर्मा अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और उन पर दो बहनों की जिम्मेदारी थी। मोहित अपने पिता सुनील वर्मा के साथ ही ज्वेलरी के कारोबार में हाथ बंटाते थे। जैसे ही जम्मू-कश्मीर पुलिस का फोन फरीदाबाद पहुंचा, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही पिता सुनील वर्मा बेसुध होकर गिर पड़े। हादसे में घायल दीपक वर्मा कोई और नहीं, बल्कि मोहित के चचेरे भाई हैं जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।

दुबई से लौटकर शक्ति ने शुरू किया था काम; मैकेनिक सिकंदर भी हादसे का शिकार

हादसे का शिकार हुए दूसरे युवक शक्ति सिंह चौधरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हापुड़ के रहने वाले थे और भूदत्त कॉलोनी में किराए पर रह रहे थे। शक्ति कुछ समय पहले ही दुबई की नौकरी छोड़कर भारत लौटे थे और यहां उन्होंने बिजली के सामान का नया बिजनेस खड़ा किया था। वहीं, तीसरे मृतक सिकंदर सैफी पेशे से कार मैकेनिक थे और बाईपास रोड पर काम करते थे। सिकंदर के पिता बसीर लकड़ी का काम करके बमुश्किल अपने परिवार का गुजारा चलाते हैं। होनहार बेटों की इस तरह असमय मौत से पूरे इलाके की आंखें नम हैं।

कॉलोनी में नहीं जला किसी के घर चूल्हा, मातम में बदलीं यादें

पड़ोसियों और स्थानीय लोगों की मानें तो पांचों युवक बेहद मिलनसार और शांत स्वभाव के थे। पूरे मोहल्ले में उनकी दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। रविवार सुबह जैसे ही यह मनहूस खबर बल्लभगढ़ पहुंची, पूरी भूदत्त कॉलोनी गहरे सदमे और सन्नाटे में डूब गई। दुख की इस घड़ी में आस-पड़ोस के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। लोग पीड़ित परिवारों के घर पहुंचकर ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रोते-बिलखते माता-पिता को संभालना मुश्किल हो रहा है। मृतकों के शवों को वापस लाने के लिए परिजन जम्मू रवाना हो चुके हैं।

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