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Faridabad fake currency: फरीदाबाद में नकली नोट छापने की फैक्ट्री का भंडाफोड़, उपकरणों के साथ आरोपी गिरफ्तार

Jun 01, 2026 10:38 AM

फरीदाबाद। दिल्ली से सटे औद्योगिक शहर फरीदाबाद का एक शांत इलाका अचानक उस वक्त छावनी में तब्दील हो गया, जब राजस्थान पुलिस की एक विशेष टीम ने यहां के बसंतपुर गांव में दबिश दी। पुलिस ने यहां चल रही नकली नोट छापने की एक मिनी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। दौसा कोतवाली पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई में गली नंबर-1 के एक किराए के मकान से 32 वर्षीय संतोष को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने मौके से जाली नोट तैयार करने वाले हाई-क्वालिटी प्रिंटर, कटर, विशेष कागज और कुछ छपे हुए संदिग्ध नोट अपने कब्जे में लिए हैं।

भागने की फिराक में था मास्टरमाइंड, घेराबंदी कर दबोचा

दौसा कोतवाली के थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने मामले की तस्दीक करते हुए बताया कि पुलिस टीम जब फरीदाबाद में संतोष के ठिकाने पर पहुंची, तो वह पूरी तरह सतर्क हो चुका था। आरोपी अपना सारा तामझाम और प्रिंटर एक गाड़ी में लोड कर शहर से रफूचक्कर होने की तैयारी में ही था। लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने वक्त गंवाए बिना पूरे इलाके की नाकेबंदी की और उसे रंगे हाथ धर दबोचा। अधिकारियों का मानना है कि संतोष इस रैकेट का बेहद अहम मोहरा है, जो नोटों की छपाई और उनकी फिनिशिंग का काम संभाल रहा था।

कड़ियों से कड़ियां जुड़ीं और बेनकाब हुआ पूरा सिंडिकेट

इस बड़े नेटवर्क के खुलासे की कहानी कुछ दिनों पहले दौसा से शुरू हुई थी। पुलिस ने सबसे पहले आयुष मीणा नाम के एक युवक को जाल बिछाकर दबोचा था, जिसके पास से 40 हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए थे। आयुष से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने राजस्थान के ही करावपुरा इलाके के रहने वाले अपने साथी कुलदीप गुर्जर का नाम उगला। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुलदीप को भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। इन दोनों आरोपियों से मिली कड़ियों और कॉल डिटेल्स को खंगालते हुए पुलिस की तफ्तीश दिल्ली होते हुए फरीदाबाद के बसंतपुर तक जा पहुंची।

असली के बदले नकली नोट: कम दाम का लालच देकर बाजारों में सेंधमारी

जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने वाले इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े होने की आशंका है। ये लोग असली नोटों के बदले बहुत कम कीमत पर नकली नोटों की खेप डीलरों को सप्लाई करते थे, जिसे बाद में छोटे दुकानदारों, साप्ताहिक बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में खपाया जाता था। आम आदमी के लिए इन नोटों की पहचान करना बेहद मुश्किल होता था क्योंकि छपाई में अच्छी क्वालिटी के उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

बड़े नेटवर्क की आशंका, जांच में जुटी कई राज्यों की पुलिस

संतोष की गिरफ्तारी के बाद अब राजस्थान पुलिस इस गिरोह की कुंडली खंगालने में जुट गई है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से यह उगलवाने की कोशिश की जाएगी कि इस धंधे के पीछे और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि अब तक यह गैंग बाजार में कितनी नकली करेंसी उतार चुका है और इनके खरीदार कहां-कहां सक्रिय हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए फरीदाबाद और दिल्ली पुलिस से भी इनपुट साझा किए जा रहे हैं और कुछ अन्य संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

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