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फरीदाबाद के अनंगपुर में तेंदुए का तांडव: कुत्तों को बना रहा शिकार, दहशत में ग्रामीण

Apr 18, 2026 11:06 AM

फरीदाबाद। फरीदाबाद का अनंगपुर गांव इन दिनों किसी डरावनी फिल्म के मंजर जैसा नजर आ रहा है। अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में बसे इस गांव में तेंदुए की सक्रियता ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीण अब सूरज ढलने का इंतजार नहीं करते, बल्कि शाम 6 बजते ही अपने घरों की चौखटों पर ताले जड़ने लगते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेंदुआ अब केवल जंगल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह बेखौफ होकर रिहायशी गलियों में चहलकदमी कर रहा है। डर इस कदर है कि सड़कों पर आवारा कुत्तों की आवाजें बंद होते ही लोग समझ जाते हैं कि 'शिकारी' आसपास ही है।

किराने की दुकान से 50 मीटर दूर तक आ रहा शिकारी, महिलाओं में भारी डर

पिछले 18 साल से गांव में रह रही और किराने की दुकान चलाने वाली अनसूईया की आंखों में अब भी वह खौफ साफ देखा जा सकता है। उन्होंने बताया, "मैंने अपने जीवन में यहां कभी तेंदुआ नहीं देखा, लेकिन पिछले दो हफ्तों से वह रोज रात को नजर आ रहा है। मेरी दुकान से महज 50 मीटर की दूरी पर उसे घूमते देखा गया है। अब शाम होते ही दुकान बढ़ाकर घर भागना पड़ता है।" यह आपबीती सिर्फ अनसूईया की नहीं, बल्कि गांव के हर उस शख्स की है जिसका घर पहाड़ी के करीब है। ग्रामीणों का दावा है कि रात 8:30 से 10:30 के बीच तेंदुए की आवाजाही सबसे ज्यादा होती है।

कुत्तों का शिकार कर बढ़ाया खौफ, अब बच्चों की सुरक्षा पर संकट

तेंदुए ने पिछले कुछ दिनों में गांव के कई पालतू और आवारा कुत्तों को अपना शिकार बनाया है। कुत्तों के गायब होने और गलियों में मिलने वाले अवशेषों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि तेंदुआ अब इंसानी बस्तियों में अपनी टेरिटरी बना रहा है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि अगर जल्द ही वन विभाग ने इसे पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। गांव के बच्चे जो शाम को पार्कों या गलियों में खेलते थे, अब उनका बाहर निकलना पूरी तरह बंद हो गया है।

वन विभाग की 'सुस्त' चाल पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

शिकायतों के बावजूद वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से अनंगपुर के लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि टीम आती है और पंजों के निशान देखकर वापस लौट जाती है, जबकि तेंदुआ आए दिन सीसीटीवी और लोगों की आंखों के सामने आ रहा है। गांव के सरपंच और मौजिज लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने जल्द ही तेंदुए को रेस्क्यू नहीं किया, तो वे जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल, पूरा गांव लाठियों और टॉर्च के भरोसे अपनी रातें काटने को मजबूर है।

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