मौत की लहरों के बीच 9 साल का 'योद्धा'; 5 KM बहा, 9 घंटे टहनी से लटका रहा मासूम; 'पैरोल' पर आए युवक ने बचाई जान
May 05, 2026 5:11 PM
फरीदाबाद । रिश्तों के कत्ल और कुदरत के करिश्मे की एक ऐसी दास्तां फरीदाबाद से सामने आई है, जिसे सुनकर कलेजा मुंह को आता है। एक पिता की दरिंदगी और मासूम बेटे की जिजीविषा के बीच आगरा नहर गवाह बनी उस खौफनाक रात की, जब 9 साल का सम्राट मौत के जबड़े से निकलकर वापस आया। पिता ने उसे और उसके 5 साल के छोटे भाई को जानबूझकर उफनती नहर में फेंक दिया था। छोटा भाई और पिता अब भी लापता हैं, लेकिन सम्राट 5 किलोमीटर तक पानी की धार से लड़ते हुए एक टहनी के सहारे 9 घंटे तक मौत को मात देता रहा।
"पिता ने मुझे फेंका..."— मासूम की जुबानी खौफनाक हकीकत
गांव असावटी निवासी सिविल इंजीनियर भगवत दयाल रविवार रात करीब 9 बजे अपने दोनों बेटों—सम्राट (9) और युग (5)—को 'संडे बाजार' घुमाने के बहाने घर से ले गया था। किसे पता था कि एक पिता ही जल्लाद बन जाएगा। डीग-फतेहपुर बिल्लोच पुल के पास पहुंचकर भगवत ने पहले सम्राट को नहर में धक्का दिया और फिर छोटे बेटे युग को गोद में लेकर खुद भी छलांग लगा दी। अंधेरी रात और नहर का बर्फीला पानी; सम्राट करीब 5 किलोमीटर तक बहता चला गया। मौत सामने थी, लेकिन तभी उसे किनारे की ओर झुकती एक पेड़ की टहनी दिखी। डूबते को तिनके का सहारा मिला और उसने उसे कसकर पकड़ लिया। रात भर वह मासूम पानी में आधा डूबा, टहनी के सहारे लटका रहा।
पैरोल पर आए युवक ने फरिश्ता बनकर बचाई जान
सोमवार सुबह करीब 7 बजे जब गांव मांगकौल का रहने वाला राजेंद्र (23) अपने दोस्तों के साथ नहर किनारे घूम रहा था, तब उसे 'बचाओ-बचाओ' की कमजोर पड़ चुकी आवाज सुनाई दी। राजेंद्र, जो इन दिनों जेल से पैरोल पर बाहर आया हुआ है, ने बिना देर किए नहर में छलांग लगा दी। राजेंद्र ने बताया, "जब हमने उसे बाहर निकाला, तो ठंड के कारण उसका शरीर सफेद पड़ चुका था। वह सुध-बुध खो चुका था।" राजेंद्र उसे तुरंत अपने घर ले गया, गरम कपड़ों में लपेटा, चाय पिलाई और कंबल में रखकर शरीर की गर्माहट लौटाई। होश आने पर जब पूछा गया कि नहर में कैसे गिरे, तो सम्राट ने रुंधे गले से बस इतना कहा— "पापा ने हमें फेंका था।"
अहमदाबाद में इंजीनियर था पिता, 4 साल से माता-पिता से था मनमुटाव
भगवत दयाल अहमदाबाद की एक कंपनी में सिविल इंजीनियर था। परिजनों के मुताबिक, घर में कोई बड़ा आर्थिक संकट नहीं था, लेकिन भगवत के व्यवहार में बदलाव था। वह पिछले 4 साल से अपने माता-पिता से बात नहीं कर रहा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद ने इस खौफनाक वारदात की पटकथा लिखी। फिलहाल, सम्राट की माँ का रो-रोकर बुरा हाल है।
SDRF की टीमें तैनात, पिता और छोटे बेटे की तलाश जारी
बल्लभगढ़ सदर थाना प्रभारी समेर सिंह ने जानकारी दी कि घटना के बाद से ही SDRF और स्थानीय पुलिस की टीमें सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। नहर के बहाव और गहराई के कारण तलाशी में मुश्किलें आ रही हैं। भगवत और 5 साल के मासूम युग का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गई है कि घरेलू कलह की आग में एक पिता इतना अंधा कैसे हो गया कि उसने अपने ही जिगर के टुकड़ों को मौत के मुहाने पर धकेल दिया। फिलहाल, पूरा इलाका सम्राट की हिम्मत और उसे बचाने वाले राजेंद्र की तारीफ कर रहा है।