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माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल में कानूनी जागरूकता सेमिनार का आयोजन: विद्यार्थियों को सिखाए अधिकार और कर्तव्य

Mar 14, 2026 8:50 PM

फरीदकोट: स्थानीय माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल में विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से एक विशेष लीगल अवेयरनेस सेशन का सफल आयोजन किया गया। "अपने अधिकार जानें, अपनी ज़िम्मेदारियां जानें" थीम पर आधारित इस सेमिनार का कुशल नेतृत्व मिस्टर ईशान, परम प्रताप वालिया, मैडम श्रुति जैन, नजम और मिस्टर टाइटस द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को कानून की बुनियादी जानकारी देकर उन्हें एक बेहतर नागरिक के रूप में तैयार करना था।

सत्र के मुख्य वक्ता एडवोकेट मिस्टर राज कुमार गुप्ता ने कक्षा आठवीं और नौवीं के विद्यार्थियों को अत्यंत सरल भाषा में कानून की बारीकियों और नियमों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार स्कूल के नियम अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं, उसी प्रकार देश का कानून एक सुरक्षित और न्यायप्रिय समाज की स्थापना करता है।

इस दौरान विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिकार, सुरक्षा और समानता जैसे महत्वपूर्ण फंडामेंटल राइट्स के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। वक्ता ने इस बात पर विशेष बल दिया कि अधिकारों और कर्तव्यों का चोली-दामन का साथ है।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने माता-पिता और शिक्षकों का आदर करें, स्कूल के नियमों का ईमानदारी से पालन करें और समाज में किसी को भी परेशान या बुली न करें। आज के डिजिटल युग की चुनौतियों को देखते हुए सेशन में साइबर सिक्योरिटी पर भी विशेष चर्चा की गई।

विद्यार्थियों को सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करने, अनजान व्यक्तियों से दूरी बनाए रखने और बिना अनुमति के किसी की फोटो या वीडियो साझा न करने की सलाह दी गई। साथ ही, उन्हें साइबर बुलिंग का शिकार होने पर तुरंत अपने अभिभावकों या शिक्षकों को सूचित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।

स्कूल के चेयरमैन इंजीनियर चमनलाल गुलाटी और प्रिंसिपल श्रीमती रजनी ठाकुर ने इस पहल की सराहना करते हुए वक्ताओं को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ कानूनी समझ विकसित करना समय की मांग है ताकि विद्यार्थी भविष्य में देश की उन्नति में अपना सही योगदान दे सकें।

कार्यक्रम के अंत में एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञों से अपने मन में उठ रहे सवालों के जवाब प्राप्त किए।

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